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68500 शिक्षक भर्ती में OBC अभ्यर्थियों को राहत की उम्मीद, आयोग ने दोहराई संशोधित परिणाम की सिफारिश

68500 शिक्षक भर्ती: OBC अभ्यर्थियों को आयोग से बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश की 68500 सहायक अध्यापक भर्ती-2018 को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने एक बार फिर OBC अभ्यर्थियों के पक्ष में महत्वपूर्ण सिफारिश की है। आयोग ने कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार अर्हता अंक में 5 प्रतिशत की छूट मिलनी चाहिए। इसके साथ ही भर्ती परीक्षा का परिणाम संशोधित करने, पात्र अभ्यर्थियों की नई सूची तैयार करने और मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी सिफारिश की गई है।

आयोग ने दोहराया अपना पुराना निर्णय

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 16 जून को आयोजित बैठक में वर्ष 2022 में जारी अपनी पूर्व संस्तुति को फिर से प्रभावी मानने का निर्णय लिया गया। आयोग का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की अधिसूचना और उत्तर प्रदेश की आरक्षण व्यवस्था के अनुसार OBC वर्ग के अभ्यर्थियों को अर्हता अंक में 5 प्रतिशत की छूट मिलना वैधानिक अधिकार है। आयोग ने माना कि 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में OBC अभ्यर्थियों को 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर सफल माना जाना चाहिए।

संशोधित परिणाम और नई चयन सूची की सिफारिश

आयोग ने संबंधित विभाग से भर्ती परीक्षा का परिणाम संशोधित करने और ऐसे सभी OBC अभ्यर्थियों की सूची तैयार करने की सिफारिश की है, जो 40 प्रतिशत अंक के आधार पर चयन के पात्र हो सकते हैं। आयोग का मानना है कि यदि नियमों के अनुरूप अर्हता अंक में छूट दी जाती है, तो कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। इसलिए विभाग से संशोधित चयन सूची तैयार कर आयोग को उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया गया है।

अन्य भर्तियों का उदाहरण देकर उठाए सवाल

अपने निर्णय में आयोग ने उल्लेख किया कि 69000 सहायक अध्यापक भर्ती, जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती तथा सहायक अध्यापक भर्ती-2021 में OBC अभ्यर्थियों को अर्हता अंक में 5 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई थी। ऐसे में केवल 68500 शिक्षक भर्ती में इस लाभ से वंचित रखना समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। आयोग ने कहा कि समान परिस्थितियों में अलग-अलग मानदंड अपनाना न्यायसंगत नहीं है और इससे समान अवसर के अधिकार पर भी प्रभाव पड़ता है।

कानूनी बाधा नहीं, अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग

आयोग ने शासन से प्राप्त दस्तावेजों और न्यायालयों के उपलब्ध आदेशों का अध्ययन करने के बाद कहा कि ऐसी कोई न्यायिक रोक या कानूनी बाधा सामने नहीं आई है, जो OBC अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत अर्हता छूट देने में अवरोध बने। इसके साथ ही आयोग ने वर्ष 2022 में जारी सिफारिशों पर समय रहते कार्रवाई न करने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने तथा आरक्षण संबंधी प्रावधानों की अनदेखी के मामले में विभागीय कार्रवाई करने की भी अनुशंसा की है।

अभ्यर्थियों में फिर जगी नियुक्ति की उम्मीद

आयोग के ताजा निर्णय के बाद वर्षों से न्याय की मांग कर रहे हजारों OBC अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि आयोग की सिफारिशों को राज्य सरकार लागू करती है, तो कई पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति का अवसर मिल सकेगा। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं कि आयोग की अनुशंसाओं पर कब और किस रूप में अमल किया जाता है।

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