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दिल्ली में ‘No PUC, No Fuel’ नियम ने बढ़ाई टेंशन: पेट्रोल पंप डीलरों ने मांगी मोहलत

18 दिसंबर से लागू होगा नया आदेश

दिल्ली सरकार ने 18 दिसंबर 2025 से बिना वैध पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल न देने का आदेश जारी किया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने यह सख्त कदम राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाया है।


पेट्रोल पंप डीलरों की व्यावहारिक चिंता

दिल्ली में करीब 650 पेट्रोल पंप हैं, जहां रोजाना औसतन 5-6 हजार लोग ईंधन भरवाने आते हैं। दिल्ली पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन ने चिंता जताई है कि हर वाहन का पीयूसी चेक करना पंप पर लंबी कतारें और ट्रैफिक जाम पैदा करेगा। इसके अलावा, सर्टिफिकेट मांगने पर ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच झगड़े और तनाव भी हो सकता है।

डीलर्स ने याद दिलाया कि पहले भी पुराने ANPR कैमरे काम न करने के कारण दो दिन में ही हटाए गए थे। इस बार भी सिस्टम की सटीकता और कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।


BS6 मानक वाले वाहनों पर जोर

मंत्री सिरसा ने कहा कि अब केवल BS6 मानक वाले वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश मिलेगा
हालांकि, दिल्ली के 156 एंट्री पॉइंट्स पर केवल कमर्शियल वाहनों से टोल और ग्रीन टैक्स वसूली की व्यवस्था है। दिल्ली के बाहर से आने वाली प्राइवेट गाड़ियों के इंजन मानक (BS4 या BS6) की जांच के लिए फिलहाल कोई ठोस सिस्टम मौजूद नहीं है।


सरकार का प्रदूषण नियंत्रण प्लान

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि बीते 10 महीनों में प्रदूषण स्तर पिछले साल के मुकाबले बेहतर हुआ है। सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं:

  • 7,500 इलेक्ट्रिक बसें: स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन के लिए बेड़े में शामिल।
  • प्रदूषण हॉटस्पॉट निगरानी: 13 प्रमुख इलाकों में विशेष निगरानी।
  • हार्ड एक्शन: निर्माण सामग्री ले जाने वाले ट्रकों और पीयूसी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और जब्ती।

बैठक पर सबकी नजरें

फिलहाल सबकी निगाहें दिल्ली सरकार और पेट्रोल पंप डीलरों के बीच होने वाली बैठक पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या नया नियम 18 दिसंबर से सुचारू रूप से लागू हो पाएगा या नहीं।


* नियम लागू करना चुनौतीपूर्ण*

नियम का उद्देश्य प्रदूषण को कम करना है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसे लागू करना मुश्किल है। पेट्रोल पंपों पर वाहनों की जांच, कतारें और सिस्टम की कमी इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं। इसके बावजूद, पर्यावरण सुधार के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।

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