सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में नया मोड़, वसुंधरा राजे समेत तीन बहनों से कोर्ट ने मांगा जवाब
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की कथित हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा मामला एक बार फिर अदालत में चर्चा का विषय बन गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान संपत्ति समझौते पर दायर आपत्ति के बाद राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उनकी बहन यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। अदालत ने अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 तय करते हुए सभी पक्षों से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
संपत्ति समझौते पर आपत्ति के बाद बढ़ा कानूनी विवाद
ग्वालियर की अदालत में सिंधिया परिवार की संपत्तियों के प्रस्तावित बंटवारे को लेकर सुनवाई हुई। मामला तब नया मोड़ ले गया जब दिवंगत पद्मावती राजे की पुत्री प्रतिमा देवी राणा ने संपत्ति समझौते पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका दावा है कि संपत्ति के बंटवारे से जुड़े सहमति पत्र की प्रक्रिया में उन्हें और उनकी बहन को शामिल नहीं किया गया तथा उनके कानूनी अधिकारों की अनदेखी की गई। अदालत ने इस आपत्ति को रिकॉर्ड पर लेते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
वसुंधरा राजे समेत तीनों बहनों ने मांगा जवाब दाखिल करने का समय
सुनवाई के दौरान राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत से विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सभी संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया और मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 निर्धारित की। अब अगली सुनवाई में सभी पक्षों के जवाब और दलीलों पर विचार किया जाएगा।
त्रिपुरा राजघराने से जुड़े उत्तराधिकार का भी उठा सवाल
मामले में आपत्ति दर्ज कराने वाली प्रतिमा देवी राणा, सिंधिया परिवार की वरिष्ठ सदस्य दिवंगत पद्मावती राजे की पुत्री हैं। पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के पूर्व राजघराने में हुआ था। याचिका में कहा गया है कि संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया में उत्तराधिकार से जुड़े उनके अधिकारों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। इन दावों की सत्यता पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
पुराने दस्तावेजों की अनुपलब्धता से बढ़ी कानूनी चुनौती
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में यह भी आया कि संपत्ति विवाद से जुड़े कुछ पुराने दस्तावेज मुख्य न्यायिक अभिलेखों में उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने संबंधित रिकॉर्ड और ऐतिहासिक दस्तावेजों की तलाश कर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत का उद्देश्य उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना है।
अगली सुनवाई पर टिकीं सभी की निगाहें
सिंधिया राजघराने की संपत्तियों से जुड़ा यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है। अदालत में दायर आपत्तियों और जवाबों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगली सुनवाई में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल अदालत ने किसी भी दावे पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है और सभी पक्षों के जवाब तथा उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की सुनवाई की जाएगी।