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DU प्रोफेसर हत्याकांड में नया खुलासा, CCTV में दिखे दो संदिग्ध; जांच में जुटी पुलिस

दिल्ली यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देबस्मिता पॉल की हत्या के मामले में जांच को नया मोड़ मिला है। पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज में एक नकाबपोश पुरुष और एक महिला संदिग्ध परिस्थितियों में सोसायटी से बाहर निकलते दिखाई दिए हैं। इन दोनों की पहचान और उनकी भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां लगातार पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द ही कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

CCTV फुटेज बना जांच का अहम आधार

हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी दिल्ली पुलिस को घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों से कुछ महत्वपूर्ण फुटेज मिले हैं। इन फुटेज में एक पुरुष और एक महिला चेहरे ढके हुए नजर आए हैं, जिनकी गतिविधियां जांच एजेंसियों को संदिग्ध लगी हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ये दोनों लोग घटना वाले दिन प्रोफेसर के फ्लैट तक पहुंचे थे या उनका इस मामले से कोई अन्य संबंध है। फिलहाल इन संदिग्धों की पहचान और उनकी लोकेशन को ट्रैक करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह सुराग मामले को सुलझाने में अहम साबित हो सकता है।

180 लोगों की जांच, 13 अब भी संदेह के घेरे में

पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल के आसपास मौजूद करीब 180 लोगों की गतिविधियों की समीक्षा की। इनमें से अधिकांश लोगों से पूछताछ के बाद उन्हें जांच से बाहर कर दिया गया है। हालांकि 13 लोगों की गतिविधियां अब भी संदेह के घेरे में हैं। जांच एजेंसियां इनके कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन हिस्ट्री और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि इन संदिग्ध व्यक्तियों में से किसी के पास ऐसा सुराग हो सकता है जो हत्या की असली वजह और आरोपियों तक पहुंचने में मदद कर सके। इसी वजह से तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर जांच को तेज कर दिया गया है।

दोपहर से शाम के बीच हुई वारदात

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि डॉ. देबस्मिता पॉल की हत्या दोपहर और शाम के बीच किसी समय हुई। पुलिस के अनुसार उन्होंने आखिरी बार दोपहर के समय एक परिचित महिला से फोन पर बातचीत की थी। इसके बाद उनसे किसी का संपर्क नहीं हो सका। जांच एजेंसियां अब मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की मदद से यह समझने का प्रयास कर रही हैं कि घटना से पहले और बाद में उनकी बातचीत किन लोगों से हुई थी। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

ड्राइवर और बहन की सतर्कता से खुला मामला

घटना का खुलासा तब हुआ जब अगले दिन प्रोफेसर को एक महत्वपूर्ण इंटरव्यू में शामिल होना था। उन्हें लेने पहुंचे ड्राइवर ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फ्लैट के बाहर सुबह का अखबार पड़ा देख उसे संदेह हुआ, क्योंकि प्रोफेसर नियमित रूप से अखबार पढ़ती थीं। इसके बाद उन्होंने उनकी बहन को सूचना दी। बहन के पहुंचने पर अपार्टमेंट प्रबंधन की मदद से फ्लैट का ताला खोला गया, जहां अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई।

पति समेत कई एंगल पर चल रही जांच

पुलिस इस हत्याकांड की जांच केवल एक दिशा में नहीं बल्कि कई संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर कर रही है। इसी क्रम में प्रोफेसर के पति को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जानकारी के अनुसार दोनों के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था और मामला अदालत में विचाराधीन था। इसके अलावा पुलिस अपार्टमेंट की सुरक्षा व्यवस्था, आगंतुकों के रिकॉर्ड और सीसीटीवी सिस्टम की स्थिति की भी जांच कर रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि परिसर में आने-जाने वालों की निगरानी पर्याप्त नहीं थी और कई कैमरे खराब पड़े थे, जिससे जांच को शुरुआती स्तर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

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