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मोदी-ट्रंप मुलाकात से क्या बदलेंगे भारत-अमेरिका संबंध? फरीद जकारिया के बयान से छिड़ी नई बहस

फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। करीब 16 महीने बाद हुई इस बैठक को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी पत्रकार और विदेश मामलों के विश्लेषक फरीद जकारिया का मानना है कि इस मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। वहीं, भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस आकलन से अलग राय रखते हुए व्यापक वैश्विक परिप्रेक्ष्य की ओर ध्यान दिलाया है।

फरीद जकारिया ने क्यों जताई सीमित उम्मीद?

एक टीवी इंटरव्यू में फरीद जकारिया ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत को अमेरिका की आवश्यकता अधिक है, जबकि अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताएं बदलती नजर आ रही हैं। उनका कहना था कि पहले क्वाड जैसे मंचों पर भारत को अपेक्षाकृत सतर्क साझेदार माना जाता था, लेकिन अब अमेरिका की भूमिका अधिक अनिश्चित दिखाई देती है। जकारिया के अनुसार, हालिया मोदी-ट्रंप मुलाकात से दोनों देशों के संबंधों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है।

पाकिस्तान को लेकर भी रखी अपनी राय

फरीद जकारिया ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक शैली और व्यक्तिगत प्राथमिकताएं पारंपरिक कूटनीति से अलग रही हैं। उन्होंने अपनी राय में कहा कि हाल के समय में ट्रंप का झुकाव पाकिस्तान के नेतृत्व की ओर अधिक दिखाई दिया है। जकारिया का मानना है कि यह स्थिति भारत-अमेरिका संबंधों के लिए नई चुनौती पैदा कर सकती है। हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत विश्लेषण है और अमेरिकी प्रशासन की कोई आधिकारिक नीति नहीं मानी जा सकती।

कंवल सिब्बल ने दिया अलग नजरिया

भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने जकारिया की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका की जरूरत केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अधिकांश देशों को अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल में कई देशों पर टैरिफ लगाए, अंतरराष्ट्रीय समझौतों से दूरी बनाई और कई वैश्विक संस्थाओं के प्रति सख्त रुख अपनाया। सिब्बल के अनुसार, ट्रंप की कार्यशैली को सामान्य अमेरिकी विदेश नीति का स्थायी स्वरूप नहीं माना जाना चाहिए।

भारत-अमेरिका संबंधों के सामने क्या हैं चुनौतियां?

हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, टैरिफ, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिले हैं। इसके बावजूद रक्षा, प्रौद्योगिकी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक शिखर बैठक से रिश्तों की पूरी दिशा तय नहीं होती, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक हित, आर्थिक साझेदारी और नियमित कूटनीतिक संवाद संबंधों को आगे बढ़ाने में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जी-7 बैठक क्यों रही अहम?

फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात करीब 16 महीने बाद हुई। इस वजह से इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों और रणनीतिक विशेषज्ञों की विशेष नजर रही। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात के वास्तविक प्रभाव का आकलन आने वाले महीनों में दोनों देशों के नीति-निर्णयों और कूटनीतिक कदमों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

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