#धार्मिक #मनोरंजन #राज्य-शहर #सोशल

Mirzapur Controversy: ‘सीन हटाओ या परिणाम भुगतो’, महाराणा प्रताप के गाने को लेकर मेवाड़ में आक्रोश

Mirzapur Controversy: फिल्म ‘मिर्जापुर’ के एक गैंगवार सीन में महाराणा प्रताप के शौर्य और हल्दीघाटी के युद्ध से जुड़े लोकप्रिय गीत ‘शूरवीर’ के इस्तेमाल को लेकर मेवाड़ में विवाद खड़ा हो गया है। उदयपुर सहित मेवाड़ क्षेत्र में इसे लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, इतिहासकार प्रो. डॉ. चंद्रशेखर शर्मा और गायक रैपरिया बालम ने इस इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। गायक का दावा है कि गाने के इस्तेमाल के लिए उनसे अनुमति नहीं ली गई।

क्या है ‘मिर्जापुर’ के सीन को लेकर विवाद?

विवाद फिल्म के एक हिंसक गैंगवार दृश्य को लेकर है। आरोप है कि इस सीन में काल्पनिक गैंगस्टर किरदारों के बीच गोलीबारी और हिंसा दिखाई गई है और इसी दौरान बैकग्राउंड में ‘शूरवीर’ गाना बजाया गया है।

यह गीत महाराणा प्रताप के शौर्य, राष्ट्रप्रेम, त्याग और हल्दीघाटी के युद्ध से जुड़े प्रसंगों को केंद्र में रखकर बनाया गया है। मेवाड़ में आपत्ति इस बात को लेकर है कि महाराणा प्रताप की वीरता और संघर्ष से जुड़े गीत को आपराधिक किरदारों के हिंसक दृश्य के साथ जोड़ना उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक छवि के अनुरूप नहीं है।

मेवाड़ में भावनाएं आहत होने का दावा

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि फिल्म के हिंसक और आपराधिक किरदारों के पीछे महाराणा प्रताप से जुड़े गीत का इस्तेमाल आपत्तिजनक है।

उनका तर्क है कि महाराणा प्रताप का व्यक्तित्व त्याग, स्वाभिमान, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण से जुड़ा हुआ है। ऐसे में गैंगवार जैसे दृश्य के साथ उनके शौर्य पर आधारित गीत का इस्तेमाल सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने फिल्म मेकर्स को चेताया

मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं को कलात्मक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी का भी ध्यान रखने की बात कही।

उनका कहना है कि क्रिएटिव लाइसेंस का मतलब यह नहीं है कि कलाकार या निर्माता सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाओं की अनदेखी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप मेवाड़ ही नहीं, बल्कि देशभर में सम्मानित ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं।

लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने फिल्म निर्माताओं से विवादित सीन और गीत के इस्तेमाल को लेकर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के मामलों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

सिंगर रैपरिया बालम का दावा- नहीं ली गई अनुमति

‘शूरवीर’ गीत के गायक और संगीतकार रैपरिया बालम ने भी फिल्म में गाने के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि फिल्म के निर्माताओं या प्रोडक्शन हाउस ने गाने को इस दृश्य में इस्तेमाल करने से पहले उनसे अनुमति नहीं ली।

रैपरिया बालम के मुताबिक, ‘शूरवीर’ गीत तैयार करने का उद्देश्य युवाओं को महाराणा प्रताप के शौर्य, राष्ट्रभक्ति और नैतिक मूल्यों से परिचित कराना था। उनका कहना है कि यदि उनसे अनुमति मांगी जाती तो वे भी इस तरह के हिंसक दृश्य के साथ गाने के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देते।

उन्होंने बताया कि इस मामले में प्रोडक्शन हाउस को कानूनी नोटिस भेजा गया है। गायक ने कहा है कि वह गाने को विवादित दृश्य से हटाए जाने तक कानूनी स्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते रहेंगे।

इतिहासकार ने भी जताया विरोध

महाराणा प्रताप के इतिहास पर शोध करने वाले प्रो. डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने भी इस इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि महाराणा प्रताप के जीवन और संघर्ष की पहचान नैतिक मूल्यों, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण से होती है।

इतिहासकार के मुताबिक, आपराधिक और हिंसक पृष्ठभूमि वाले काल्पनिक दृश्य में महाराणा प्रताप से जुड़े गीत का इस्तेमाल ऐतिहासिक व्यक्तित्व की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से मामले का संज्ञान लेने तथा विवादित सीन की समीक्षा करने की मांग की है।

क्या फिल्म से हटेगा ‘शूरवीर’ गाना?

विवाद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फिल्म निर्माता ‘शूरवीर’ गीत को संबंधित दृश्य से हटाएंगे। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार गायक रैपरिया बालम की ओर से कानूनी नोटिस भेजे जाने का दावा किया गया है।

वहीं मेवाड़ में भी इस मामले को लेकर विरोध के स्वर सामने आ रहे हैं। हालांकि फिल्म निर्माताओं की ओर से इस विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया या सीन हटाने को लेकर कोई स्पष्ट फैसला सामने आना बाकी है।

कला की स्वतंत्रता बनाम सांस्कृतिक संवेदनशीलता

इस विवाद ने एक बार फिर फिल्मों में रचनात्मक स्वतंत्रता और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। फिल्म निर्माता जहां कहानी और प्रस्तुति के लिए रचनात्मक स्वतंत्रता का इस्तेमाल करते हैं, वहीं ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक प्रतीकों से जुड़े कंटेंट को लेकर दर्शकों और संबंधित समुदायों की संवेदनशीलता भी महत्वपूर्ण रहती है।

अब देखना होगा कि निर्माता इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और गाने के इस्तेमाल को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *