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जयपुर में पंचायतीराज कर्मचारियों का बड़ा आंदोलन, ‘जल समाधि’ की चेतावनी

राजस्थान में भजनलाल सरकार के खिलाफ पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। ‘स्वाभिमान बचाओ आंदोलन’ के तहत कर्मचारी 20 दिनों से हड़ताल पर हैं और अब जयपुर कूच की तैयारी कर रहे हैं। कर्मचारियों ने 7 जुलाई को जल महल के सामने जल समाधि की चेतावनी दी है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और बिगड़ते हालात

पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारी लंबे समय से अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में कार्यरत ये कर्मचारी पेन-डाउन हड़ताल पर हैं, जिससे ग्राम पंचायतों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। प्रमाण पत्र, विकास कार्य और प्रशासनिक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित और ठोस समाधान चाहते हैं।

ग्रामीण प्रशासन पर पड़ा सीधा असर

लगातार हड़ताल के चलते ग्रामीण विकास योजनाओं की गति रुक गई है। ‘ग्रामीण सेवा शिविर-2026’ का बहिष्कार भी किया गया है। कर्मचारी कार्यालयों में उपस्थित तो हैं, लेकिन किसी भी सरकारी कार्य को आगे नहीं बढ़ा रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और विभागीय बैठकों का भी सामूहिक बहिष्कार किया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है।

जयपुर कूच का चरणबद्ध कार्यक्रम

कर्मचारी संगठनों ने 23 से 25 जून के बीच बड़े पैमाने पर जयपुर कूच की घोषणा की है। जिलास्तरीय पदाधिकारी पहले राजधानी पहुंचेंगे, इसके बाद ब्लॉक स्तर के कर्मचारी जुड़ेंगे। जयपुर में सचिवालय और विभागीय अधिकारियों को मांग पत्र सौंपकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। संगठन का दावा है कि यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग उत्तराखंड पैटर्न पर कैडर पुनर्गठन है। इसके अलावा स्वतंत्र कार्य विभाजन, नई पदोन्नति नीति, अंतर-जिला तबादला व्यवस्था और पदनाम परिवर्तन जैसी मांगें शामिल हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के लिए हार्ड ड्यूटी भत्ता और अतिरिक्त वित्तीय लाभ की भी मांग की जा रही है।

आंदोलन के उग्र होने की चेतावनी

अगर सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। 6 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास घेराव की योजना बनाई गई है, जबकि 7 जुलाई को जल महल के सामने ‘जल समाधि’ की घोषणा ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। संगठन का कहना है कि यह कदम अंतिम चेतावनी होगा।

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