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बड़ा सियासी झटका: राघव चड्ढा का इस्तीफा, अरविंद केजरीवाल से मुलाकात का खुलासा

आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, जहां वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम के बीच अरविंद केजरीवाल और चड्ढा की एक अहम मुलाकात का खुलासा हुआ है, जिसमें पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत पहले ही मिल चुके थे। कई सांसदों के सामूहिक इस्तीफे ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

AAP में बड़ी टूट: 10 में से 7 सांसदों ने छोड़ी पार्टी

आम आदमी पार्टी के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने इस्तीफा दे दिया, जिनमें पंजाब से जुड़े प्रमुख चेहरे शामिल हैं। इन नेताओं में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और हरभजन सिंह शामिल हैं। वहीं दिल्ली से स्वाति मालीवाल ने भी पार्टी छोड़ी। यह घटनाक्रम पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे संगठन की स्थिरता और नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं।

केजरीवाल को पहले से था असंतोष का अंदेशा

सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल को पहले ही पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का अंदेशा हो गया था। इसी के चलते उन्होंने सांसदों के साथ एक अहम बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने साफ कहा था कि अगर कोई नेता पार्टी में असहज महसूस कर रहा है, तो वह अपने पद से इस्तीफा दे सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में उन्हें दोबारा टिकट देकर चुनाव लड़ने का मौका दिया जा सकता है। हालांकि, इस संवाद के बावजूद कई सांसदों ने अचानक इस्तीफा देकर पार्टी को चौंका दिया।

BJP में शामिल होने पर मिला गर्मजोशी से स्वागत

AAP छोड़ने वाले नेताओं ने दावा किया कि उनका फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत है और उन्होंने किसी दबाव में यह कदम नहीं उठाया। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इन नेताओं का स्वागत किया गया। पार्टी नेतृत्व ने इसे अपनी मजबूती का संकेत बताया। वहीं AAP की ओर से इस घटनाक्रम को “जनादेश के साथ विश्वासघात” करार दिया गया। भगवंत मान ने इस्तीफा देने वाले नेताओं को “गद्दार” तक कह दिया, जिससे सियासी बयानबाजी और तेज हो गई।

राघव चड्ढा का बयान: सिद्धांतों से भटक गई पार्टी

राघव चड्ढा ने अपने इस्तीफे को लेकर भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के करीब 15 साल पार्टी को दिए और इसे खून-पसीने से सींचा। लेकिन अब वही पार्टी अपने मूल सिद्धांतों, नैतिकता और मूल्यों से भटक चुकी है। यही कारण है कि उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया। चड्ढा ने यह भी बताया कि उन्होंने राज्यसभा सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और आगे की राजनीतिक दिशा पर विचार करेंगे।

पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी नाराजगी

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, राघव चड्ढा की नाराजगी पिछले कुछ समय से बढ़ रही थी। हाल ही में उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी गई थी। इस फैसले को लेकर चड्ढा ने अप्रत्यक्ष रूप से असहमति जताई थी। माना जा रहा है कि यही घटनाक्रम उनके इस्तीफे की बड़ी वजह बना। अब उनके पार्टी छोड़ने से AAP के नेतृत्व और रणनीति पर नए सिरे से सवाल उठ रहे हैं।

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