अमेरिका का बड़ा सैन्य फैसला: ‘इंडो-पैसिफिक’ से हटाया ‘इंडो’, भारत की भूमिका पर उठे सवाल
अमेरिका ने अपने सबसे बड़े सैन्य कमांड ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ के नाम में बदलाव करते हुए ‘इंडो’ शब्द हटा दिया है और पुराना नाम ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ फिर से अपनाने का फैसला किया है। इस कदम ने रणनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, खासकर ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अहम बैठक की चर्चा चल रही है। हालांकि अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव का ऑपरेशनल जिम्मेदारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा
नाम बदला, लेकिन जिम्मेदारी वही—अमेरिका का आधिकारिक बयान
अमेरिकी रक्षा विभाग और US PACOM ने स्पष्ट किया है कि नाम परिवर्तन केवल प्रशासनिक है और इससे कमांड के मिशन या क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ साझेदारी पर कोई बदलाव नहीं होगा। बयान में कहा गया कि कमांड की “फ्री और ओपन थिएटर” बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह ही मजबूत बनी रहेगी। इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन और स्थिरता सुनिश्चित करना बताया गया है।
‘इंडो’ हटने से रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज
नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाए जाने के बाद जियो-पॉलिटिकल विश्लेषकों के बीच बहस तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञ इसे अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं। चर्चा यह भी है कि इससे भारत की भूमिका प्रतीकात्मक रूप से कमजोर होती दिख सकती है, हालांकि इसका कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। 2018 में जब ‘इंडो-पैसिफिक’ नाम अपनाया गया था, तब इसे भारत को चीन संतुलन रणनीति में शामिल करने के संकेत के रूप में देखा गया था।
चीन को रोकने की रणनीति या नई प्राथमिकता?
विश्लेषकों के मुताबिक ‘इंडो-पैसिफिक’ फ्रेमवर्क का मूल उद्देश्य चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना था, जिसमें भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में शामिल था। अब नाम में बदलाव को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका अपनी रणनीति में चीन, भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र को लेकर नया दृष्टिकोण अपना रहा है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसे केवल संरचनात्मक बदलाव बता रहे हैं, न कि नीति परिवर्तन।
भारत की भूमिका पर बहस, विशेषज्ञों की अलग राय
कुछ जियो-पॉलिटिकल विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत की रणनीतिक भूमिका में गिरावट का संकेत नहीं है, बल्कि अमेरिका की व्यापक इंडो-पैसिफिक नीति में समायोजन है। उनका कहना है कि क्वाड और द्विपक्षीय सहयोग पहले की तरह जारी रहेगा। वहीं कुछ विश्लेषक इसे संकेत मान रहे हैं कि अमेरिका की प्राथमिकताएं अब अधिक फ्लेक्सिबल और क्षेत्रीय संतुलन आधारित हो रही हैं।
PACOM का संदेश: ‘फ्री एंड ओपन’ मिशन जारी रहेगा
US PACOM ने दोहराया है कि उसका मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र और खुला समुद्री और हवाई मार्ग सुनिश्चित करना है। रणनीतिक शब्दावली में इसे चीन के प्रभाव को संतुलित करने की नीति से जोड़ा जाता है। अमेरिका का कहना है कि नाम में बदलाव के बावजूद इस मिशन में कोई कमी नहीं आएगी और साझेदार देशों के साथ सहयोग पहले की तरह मजबूत रहेगा।