अलवर जिला अस्पताल के जर्जर भवनों पर बड़ा अलर्ट, पुरानी मोर्चरी में पोस्टमार्टम बंद
अलवर जिला अस्पताल में मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सर्वे रिपोर्ट में कई भवनों को जर्जर और असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने पुरानी मोर्चरी में पोस्टमार्टम का कार्य बंद कर नई मोर्चरी में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिपोर्ट में सामान्य, महिला और शिशु अस्पताल के कई हिस्सों को तत्काल खाली कराने और उनके उपयोग पर रोक लगाने की सिफारिश की गई है।
पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट के बाद हरकत में आया अस्पताल प्रशासन
सार्वजनिक निर्माण विभाग की संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट में जिला अस्पताल परिसर के कई भवनों की स्थिति को गंभीर रूप से जर्जर बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन भवनों का उपयोग जारी रखना सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम भरा है। विभाग ने स्पष्ट सिफारिश की है कि अत्यधिक क्षतिग्रस्त भवनों को खाली कराकर उनका उपयोग तत्काल बंद किया जाए और भविष्य में उनका पुनर्निर्माण कराया जाए। रिपोर्ट अस्पताल प्रशासन को जुलाई के पहले सप्ताह में सौंप दी गई थी, जिसके बाद अब धीरे-धीरे वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।
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पुरानी मोर्चरी बंद, नई मोर्चरी में शुरू होगी पोस्टमार्टम व्यवस्था
रिपोर्ट के आधार पर सबसे पहले सामान्य अस्पताल परिसर स्थित पुरानी मोर्चरी में पोस्टमार्टम का कार्य रोक दिया गया है। अब यह व्यवस्था नई मोर्चरी में स्थानांतरित की जा रही है। हालांकि नई मोर्चरी में अभी डीप-फ्रीजर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार आवश्यक उपकरणों को नई इमारत में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही सभी व्यवस्थाएं पूरी कर दी जाएंगी ताकि पोस्टमार्टम कार्य बिना किसी बाधा के संचालित हो सके।
तीनों अस्पतालों के कई भवन असुरक्षित घोषित
सर्वे रिपोर्ट में सामान्य अस्पताल, महिला चिकित्सालय और शिशु चिकित्सालय के कई हिस्सों को अत्यंत जर्जर श्रेणी में रखा गया है। सामान्य अस्पताल की पुरानी मोर्चरी, कुछ शौचालय, गैलरी, मैस भवन और अन्य संरचनाओं को असुरक्षित बताया गया है। वहीं महिला अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर से जुड़े हिस्सों, आईसीयू के बाहरी छज्जों और अन्य संरचनाओं को भी जोखिमपूर्ण माना गया है। शिशु अस्पताल में गैलरी, वार्ड, ओपीडी, स्टोर, टीकाकरण कक्ष और कई बीम व छज्जों में गंभीर क्षति मिलने की बात रिपोर्ट में दर्ज की गई है।
मरम्मत नहीं, पुनर्निर्माण की सिफारिश
पीडब्ल्यूडी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि कई भवनों की स्थिति ऐसी है जहां अस्थायी मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। विभाग का मानना है कि इन भवनों को उपयोग से बाहर कर तोड़कर नए भवन बनाए जाने चाहिए। जब तक नया निर्माण नहीं हो जाता, तब तक अस्पताल प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि चेतावनी के बावजूद जर्जर भवनों का उपयोग जारी रखा जाता है और कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी सार्वजनिक निर्माण विभाग की नहीं होगी।
सुरक्षा के मद्देनजर वैकल्पिक व्यवस्था तेज
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों, चिकित्सकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण शिशु अस्पताल के कुछ जर्जर हिस्सों का उपयोग पहले ही बंद किया जा चुका है, जबकि सामान्य और महिला अस्पताल में भी चरणबद्ध तरीके से सेवाओं को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुए बिना सभी आवश्यक विभाग सुरक्षित भवनों से संचालित किए जाएं और भविष्य में नए भवनों के निर्माण की दिशा में भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।