कोटड़ी भट्टी कांड में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई: तत्कालीन पटवारी बर्खास्त, कर्मचारी संगठनों ने खोला मोर्चा
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में चर्चित कोटड़ी भट्टी कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में जिला प्रशासन ने तत्कालीन पटवारी हरदेव बैरवा को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद राजस्व कर्मचारी संगठनों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। वहीं, बर्खास्त कर्मचारी ने खुद को निर्दोष बताते हुए फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। इस घटनाक्रम के बाद जिले में राजस्व सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
तीन साल पुराने चर्चित मामले में हुई कार्रवाई
भीलवाड़ा जिले के नरसिंहपुरा गांव में 2 अगस्त 2023 को हुए चर्चित कोटड़ी भट्टी कांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इस मामले में एक नाबालिग की कथित रूप से कोयला भट्टी में जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने विभिन्न स्तरों पर जांच की थी। अब जिला प्रशासन ने इस प्रकरण से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा के बाद तत्कालीन गिरड़िया हल्का पटवारी हरदेव बैरवा को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
राजस्व कर्मचारी संगठनों ने जताया विरोध
पटवारी की बर्खास्तगी के फैसले का राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ सहित कई कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया है। संगठनों का कहना है कि कार्रवाई एकतरफा और अत्यधिक कठोर है। आपात बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले के सभी उपखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निर्णय पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो जिले के पटवारी और कानूनगो अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में नामांतरण, सीमांकन और फसल गिरदावरी जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
बर्खास्त पटवारी ने खुद को बताया निर्दोष
बर्खास्त किए गए हरदेव बैरवा ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में दावा किया कि विभागीय जांच में उन्हें दोषी नहीं माना गया था, इसके बावजूद उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि वे हृदय रोग से पीड़ित हैं और संबंधित क्षेत्र में उनकी तैनाती भी हाल ही में हुई थी। बैरवा ने आरोप लगाया कि उन्हें मामले में “बलि का बकरा” बनाया गया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बहाली की मांग, आंदोलन की चेतावनी
शाहपुरा के कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को पत्र भेजकर बर्खास्तगी के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही पाई गई थी, तो उसके अनुरूप दंड दिया जा सकता था, लेकिन सेवा से बर्खास्त करना अत्यधिक कठोर कदम है। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई और कर्मचारी संगठनों के विरोध के बीच यह मामला फिर से प्रदेश की चर्चा का केंद्र बन गया है।
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