अलवर में 2019 हत्याकांड का फैसला, महिला को छोड़ बाकी दोषियों को उम्रकैद
अलवर के रामगढ़ थाना क्षेत्र के गुर्जरपुर खुर्द में वर्ष 2019 में हुए हत्या के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश कोर्ट संख्या-3 ने एक महिला आरोपी को छोड़कर बाकी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 28,700 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला पीठासीन अधिकारी ज्योति के. सोनी ने सुनाया। करीब पांच साल पुराने इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 24 गवाह और 77 दस्तावेज अदालत के सामने पेश किए गए थे।
मोटरसाइकिल चलाने को लेकर शुरू हुआ था विवाद
विशिष्ट लोक अभियोजक अजीत यादव के अनुसार मामले की शुरुआत 15 जून 2019 को हुई थी। गुर्जरपुर खुर्द निवासी कवरपाल के खेतों के पास मोटरसाइकिल तेज चलाने को लेकर सुनील और देवकी के बीच कहासुनी हुई थी।
उस समय दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था और विवाद शांत हो गया। हालांकि, अभियोजन के मुताबिक बाद में यही विवाद पुरानी रंजिश में बदल गया।
बोरवेल पर पानी लेने गई थी भीमवती
अभियोजन के अनुसार 17 जून 2019 की शाम करीब 6 बजे कवरपाल की भाभी भीमवती अकेली बोरवेल पर पानी लेने गई थीं। इसी दौरान आरोपी पक्ष के लोग वहां पहुंचे।
आरोप है कि प्रकाश, भीम सिंह, मुकेश, ओम सिंह, करण, लालाराम, मेवाराम, सुनील, कर्री, धनसिंह और वीरवती धारदार हथियारों और बंदूकों से लैस थे। उन्होंने भीमवती के साथ मारपीट शुरू कर दी।
बचाने पहुंचे परिजनों पर भी हमला
भीमवती की चीख-पुकार सुनकर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे। मृतक बंशी के साथ हुकमचंद, रामचरण, श्रीचंद, गणपत, पूरण, सलोनी और कवरपाल भी वहां पहुंचे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपियों ने बीच-बचाव करने आए लोगों पर भी हमला कर दिया। इस दौरान बंशी को सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। परिवार के अन्य सदस्यों को भी चोटें आईं।
रामगढ़ थाने में दर्ज हुआ था मामला
घटना के बाद रामगढ़ थाने में मामला दर्ज कराया गया था। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
24 गवाह और 77 दस्तावेज बने आधार
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 24 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इसके अलावा अदालत के समक्ष 77 दस्तावेज भी पेश किए गए।
वहीं, आरोपियों की ओर से भी अपने बयान और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों पर अदालत ने विचार किया।
वीरवती को छोड़ बाकी दोषियों को उम्रकैद
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने आरोपी वीरवती को दोषमुक्त कर दिया। वहीं अन्य दोषियों को हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 28,700 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। मामले में अदालत के फैसले के बाद करीब पांच साल से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है।
अदालत के फैसले पर टिकी नजर
2019 में हुई इस वारदात ने रामगढ़ क्षेत्र में काफी चर्चा पैदा की थी। अब अदालत के फैसले के बाद मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा मिली है।
वहीं, एक महिला आरोपी को अदालत ने दोषमुक्त किया है। अदालत का फैसला मामले में पेश किए गए गवाहों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आया है।