#क्राइम #पॉलिटिक्स #राज्य-शहर

महेश जोशी को कोर्ट से राहत नहीं, गिरफ्तारी को वैध मानते हुए याचिका खारिज

भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री महेश जोशी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग करने वाली उनकी याचिका विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में माना कि जांच एजेंसी ने गिरफ्तारी के दौरान आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पर्याप्त रूप से पालन किया और परिजनों को समय पर सूचना भी उपलब्ध कराई गई थी।

गिरफ्तारी को चुनौती देकर मांगी थी रिहाई

पूर्व मंत्री महेश जोशी की ओर से अदालत में प्रस्तुत याचिका में दावा किया गया था कि उनकी गिरफ्तारी कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं की गई। बचाव पक्ष का कहना था कि गिरफ्तारी के समय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों का पालन नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के आधारों की लिखित सूचना उनके परिवार या अधिवक्ता को समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे पूरी प्रक्रिया अवैध हो जाती है। इसी आधार पर तत्काल रिहाई की मांग की गई थी।

एसीबी ने अदालत में रखा अपना पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच टीम विधिवत आदेशों के साथ पूर्व मंत्री के आवास पर पहुंची थी। वहां मौजूद परिवार के सदस्यों को पूरी जानकारी दी गई और जांच एजेंसी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आवश्यक व्यक्तिगत कार्यों के लिए पर्याप्त समय भी दिया। इसके बाद उन्हें ब्यूरो मुख्यालय लाकर नियमानुसार गिरफ्तार किया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह भी कहा कि पूरी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से की गई थी।

व्हाट्सएप कॉल और फोन से दी गई थी सूचना

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी की सूचना पूर्व मंत्री के पुत्र को फोन और व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से दी गई थी। इसके अलावा जब आरोपी को अदालत में पेश किया गया, उस दौरान भी परिवार को लगातार जानकारी उपलब्ध कराई गई। इस संबंध में कॉल रिकॉर्ड और स्क्रीनशॉट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जांच एजेंसी का तर्क था कि सूचना देने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई और कानूनी दायित्वों का निर्वहन किया गया।

अदालत ने क्यों खारिज की याचिका?

विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि कानून का मूल उद्देश्य आरोपी को बचाव का अवसर उपलब्ध कराना है। अदालत ने माना कि रिमांड सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता मौजूद थे और उन्होंने विस्तृत बहस भी की थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि परिवार और वकीलों को गिरफ्तारी की जानकारी समय पर प्राप्त हो चुकी थी। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना जा सकता।

भ्रष्टाचार मामले की जांच जारी

अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब महेश जोशी की कानूनी लड़ाई आगे बढ़ेगी। भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले में एसीबी की जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। अदालत के ताजा आदेश के बाद जांच एजेंसी के कदमों को प्रारंभिक कानूनी समर्थन मिला है। वहीं बचाव पक्ष आगे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *