अलवर में स्कूल टैंपो से गिरकर LKG छात्र की मौत, ओवरलोडिंग पर उठे गंभीर सवाल
राजस्थान के अलवर जिले के रैणी कस्बे में स्कूल से घर लौट रहे पांच वर्षीय एलकेजी छात्र की टैंपो से गिरने के बाद मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब स्कूली बच्चों से भरे टैंपो को झटका लगा और मासूम सड़क पर गिर गया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, जहां से जयपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद निजी स्कूल वाहनों में ओवरलोडिंग और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्कूल से लौटते समय हुआ दर्दनाक हादसा
रैणी कस्बे के रामपुरा मार्ग स्थित एक निजी स्कूल में एलकेजी में पढ़ने वाला पांच वर्षीय दीक्षित कोली सोमवार दोपहर स्कूल की छुट्टी के बाद टैंपो से अपने गांव लौट रहा था। पुलिस और स्थानीय जानकारी के अनुसार बाजोली रोड पर चलते समय टैंपो को अचानक झटका लगा, जिससे बच्चा वाहन से नीचे गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उसे रैणी अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे जयपुर रेफर किया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम ने दम तोड़ दिया।
परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक दीक्षित कोली के पिता प्रमोद कोली मजदूरी के रूप में मकानों की रंगाई-पुताई का कार्य करते हैं। बेटे की असमय मौत से परिवार गहरे सदमे में है। घटना की सूचना मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जानकारी मिलने की पुष्टि की है। रैणी के उपखंड अधिकारी ने कहा है कि क्षेत्र में संचालित सभी स्कूल वाहनों की जांच कराई जाएगी, जबकि पुलिस का कहना है कि समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में औपचारिक मामला दर्ज नहीं हुआ था।
ओवरलोडिंग और सुरक्षा नियमों पर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई निजी स्कूल निर्धारित नियमों का पालन किए बिना टैंपो और अन्य निजी वाहनों से बच्चों का परिवहन कर रहे हैं। आरोप है कि कई वाहनों में क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को बैठाया जाता है और सुरक्षा संबंधी आवश्यक व्यवस्थाएं भी नहीं होतीं। लोगों का कहना है कि ऐसे वाहन रोजाना मुख्य मार्गों से गुजरते हैं, लेकिन निगरानी और कार्रवाई का अभाव बना रहता है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया क्षमता से अधिक भरा था टैंपो
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस टैंपो में दीक्षित सवार था, उसमें करीब 20 बच्चे बैठे हुए थे, जबकि वाहन की क्षमता इससे काफी कम बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वाहन की स्थिति भी अच्छी नहीं थी और उसी वाहन से प्रतिदिन बच्चों को स्कूल लाया-ले जाया जाता था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। परिवहन और शिक्षा विभाग अब मामले की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में हैं।
स्कूल वाहनों की जांच के निर्देश, कार्रवाई की तैयारी
घटना के बाद प्रशासन ने स्कूल वाहनों की जांच कराने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में ओवरलोडिंग, फिटनेस प्रमाणपत्र की कमी या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे ने एक बार फिर स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन को लेकर सख्त निगरानी और नियमों के प्रभावी पालन की आवश्यकता को सामने ला दिया है।
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