Lipulekh Pass: नेपाल की आपत्ति के बीच लिपुलेख मार्ग से होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, भारतीय राजदूत ने दी जानकारी
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर भारत की तैयारियां तेज हो गई हैं। चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने स्पष्ट किया है कि इस बार श्रद्धालु सिक्किम के नाथुला दर्रे के साथ-साथ उत्तराखंड के लिपुलेख पास के रास्ते से भी यात्रा कर सकेंगे। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब नेपाल लिपुलेख क्षेत्र पर अपना दावा जताते हुए आपत्ति दर्ज करा चुका है।
तिब्बत दौरे पर भारतीय राजदूत ने तैयारियों का लिया जायजा
चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र का दौरा कर कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय चीनी अधिकारियों के साथ लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की। यह दौरा बड़े पैमाने पर शुरू होने वाली यात्रा से पहले तैयारियों का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया था।
कैलाश पर्वत की परिक्रमा के बाद जारी किया संदेश
माउंट कैलाश की परिक्रमा पूरी करने के बाद भारतीय राजदूत ने एक वीडियो संदेश जारी कर इसे जीवन की यादगार यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया है और आधिकारिक यात्रा मार्गों की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। उन्होंने यात्रा में शामिल होने वाले सभी भारतीय श्रद्धालुओं का स्वागत भी किया।
नाथुला के साथ लिपुलेख मार्ग भी रहेगा खुला
राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने बताया कि इस वर्ष श्रद्धालु सिक्किम के नाथुला दर्रे के अलावा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के रास्ते भी कैलाश मानसरोवर यात्रा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों प्रवेश बिंदुओं का निरीक्षण किया जा चुका है और यात्रा को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
नेपाल की आपत्तियों के बावजूद जारी रहेगी यात्रा
लिपुलेख मार्ग को लेकर नेपाल ने हाल ही में आपत्ति जताई थी और भारत तथा चीन के समक्ष विरोध दर्ज कराया था। नेपाल का दावा है कि यह क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है। हालांकि भारत का कहना है कि लिपुलेख उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पारंपरिक मार्ग है और दशकों से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इसका उपयोग किया जाता रहा है।
सीमा विवाद के समाधान के लिए मौजूद हैं तंत्र
भारत ने नेपाल की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवादों के समाधान के लिए स्थापित तंत्र और संवाद के माध्यम उपलब्ध हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, किसी भी लंबित मुद्दे का समाधान द्विपक्षीय वार्ता के जरिए किया जाएगा और एकतरफा दावों से मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता।
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है लिपुलेख मार्ग
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से होकर गुजरने वाला लिपुलेख दर्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक और महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यह रास्ता वर्षों से भारतीय श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख प्रवेश द्वार रहा है और इसे यात्रा की दृष्टि से सुविधाजनक माना जाता है।