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कोटा किडनी फेल मामला: पीड़िताओं ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार, बोलीं- किडनी ट्रांसप्लांट कराएं या इच्छा मृत्यु दें

राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने के मामले में उपचाररत महिलाओं ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर किडनी ट्रांसप्लांट कराने या इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की मांग की है। लगातार डायलिसिस से हो रही परेशानियों का हवाला देते हुए पीड़िताओं ने कहा कि मौजूदा स्थिति में सामान्य जीवन जीना बेहद कठिन हो गया है। दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मरीजों की हालत पहले से बेहतर है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज लगातार जारी है।

डायलिसिस से परेशान पीड़िताओं ने उठाई किडनी ट्रांसप्लांट की मांग

मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में मई महीने में सी-सेक्शन के बाद कई प्रसूताओं में किडनी फेल होने के मामले सामने आए थे। इस घटना में अब तक पांच महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि पांच का उपचार जारी है और दो महिलाओं को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। छुट्टी मिलने के बावजूद उनकी नियमित डायलिसिस की जा रही है। उपचाररत महिलाओं का कहना है कि लगातार डायलिसिस से उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर जल्द किडनी ट्रांसप्लांट कराने या इच्छा मृत्यु देने की मांग की है।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन बोला- मरीजों की हालत में सुधार

कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन के अनुसार उपचाराधीन महिलाओं की स्थिति शुरुआती दिनों की तुलना में बेहतर हुई है और आगे भी सुधार की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि नेफ्रोलॉजी विभाग में प्रतिदिन बड़ी संख्या में डायलिसिस मरीजों का उपचार किया जाता है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में इन महिलाओं का भी इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मरीज चाहें तो अस्पताल में भर्ती रह सकती हैं या घर पर परिवार के साथ रहकर केवल डायलिसिस के लिए अस्पताल आ सकती हैं। फिलहाल सभी मरीजों का उपचार विशेषज्ञ टीम की निगरानी में जारी है।

परिवारों पर बढ़ा आर्थिक और मानसिक दबाव

इलाज करा रही महिलाओं और उनके परिजनों का कहना है कि लंबे समय से अस्पताल के चक्कर लगाने के कारण परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है। एक पीड़िता ने बताया कि सप्ताह में तीन बार डायलिसिस के दौरान उल्टी, चक्कर और अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। वहीं दूसरी महिला के परिवार का कहना है कि लगातार अस्पताल में रहने के कारण उनके पति की नौकरी चली गई, जिससे परिवार की आय प्रभावित हुई है। नवजात बच्चों की देखभाल भी प्रभावित हो रही है और पूरे परिवार को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

जांच जारी, अब तक पांच मौतें और कई अधिकारियों पर कार्रवाई

इस मामले में राज्य सरकार पहले ही दो चरणों में कार्रवाई कर चुकी है। एक चिकित्सक को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि तीन डॉक्टरों और चार नर्सिंग कर्मियों को निलंबित किया गया। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। सरकार द्वारा गठित जांच समिति पूरे मामले की जांच कर रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में कुल 12 महिलाओं को प्रभावित माना गया था। इनमें पांच महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि अन्य का इलाज जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

घटनाक्रम पर बनी हुई है सभी की नजर

मई में सामने आए इस मामले के बाद से स्वास्थ्य विभाग लगातार इसकी निगरानी कर रहा है। प्रभावित महिलाओं की स्थिति, उपचार प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर समय-समय पर समीक्षा की जा रही है। हाल ही में पीड़िताओं द्वारा डायलिसिस को लेकर जताई गई चिंता और राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट, चिकित्सा विशेषज्ञों की राय और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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