दिल्ली-NCR में गाड़ियों में एयर फिल्टर हो सकते हैं अनिवार्य, 2028 से सड़क पर होगी धुएं की जांच
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की विशेषज्ञ समिति ने कई अहम सिफारिशें की हैं। इनमें वाहनों में विशेष केबिन एयर फिल्टर अनिवार्य करना और 1 अप्रैल 2028 से सड़क पर चलते वाहनों के उत्सर्जन की जांच करना शामिल है। प्रस्तावित तकनीक से वाहनों को रोके बिना उनके धुएं में मौजूद प्रदूषक कणों की पहचान की जा सकेगी। इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय और लागू होने की शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं।
गाड़ियों में लग सकते हैं विशेष केबिन एयर फिल्टर
दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच अब गाड़ियों के भीतर की हवा को भी साफ रखने पर जोर दिया जा रहा है। CAQM की विशेषज्ञ समिति ने वाहनों में विशेष केबिन एयर फिल्टर लगाने की सिफारिश की है।इन फिल्टरों का उद्देश्य गाड़ी के केबिन में बाहर की प्रदूषित हवा से आने वाले बारीक कणों को कम करना है। इनमें PM2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक शामिल हैं, जो सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं।समिति की अंतरिम रिपोर्ट में हानिकारक गैसों और वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (VOCs) को भी ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया है। हालांकि, फिल्टर की तकनीकी क्षमता और अनिवार्यता से जुड़े अंतिम मानक अभी स्पष्ट नहीं हैं।
2028 से सड़क पर चलते वाहनों के धुएं की जांच का प्रस्ताव
वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण की निगरानी के लिए समिति ने सड़क किनारे विशेष जांच उपकरण लगाने की सिफारिश की है। इन उपकरणों की मदद से गुजरते वाहनों के उत्सर्जन का आकलन किया जा सकेगा।प्रस्तावित व्यवस्था में वाहनों को जांच के लिए रोकना जरूरी नहीं होगा। उपकरण सड़क पर चलते वाहनों से निकलने वाले धुएं में प्रदूषकों की मात्रा माप सकेंगे।इसके साथ ही कैमरों की मदद से नंबर प्लेट की पहचान कर जांच के नतीजों को संबंधित वाहन के रिकॉर्ड से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। समिति ने 1 अप्रैल 2028 से ऐसी जांच अनिवार्य करने की सिफारिश की है।हालांकि, यह अभी सिफारिश है। इसे लागू करने के लिए संबंधित अधिकारियों के अंतिम फैसले और विस्तृत नियमों का इंतजार करना होगा।
ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की दोबारा जांच होगी
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान करना नहीं है। इसके जरिए ऐसे वाहनों को निर्धारित उत्सर्जन सीमा के भीतर लाने पर भी जोर दिया जाएगा।यदि किसी वाहन से तय सीमा से अधिक प्रदूषण निकलता पाया जाता है, तो उसकी दोबारा जांच कराई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर वाहन की मरम्मत कराने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।इससे वाहनों के रखरखाव और प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान बढ़ सकता है। हालांकि, उल्लंघन पाए जाने पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और संभावित कार्रवाई के नियम अभी स्पष्ट होने बाकी हैं।
PUC व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
वर्तमान में वाहनों के प्रदूषण स्तर की जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC व्यवस्था लागू है। CAQM की विशेषज्ञ समिति ने इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।रिपोर्ट में जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण देश में ही तैयार करने का सुझाव भी दिया गया है। इससे तकनीक की लागत कम करने और जांच व्यवस्था को व्यापक बनाने में मदद मिल सकती है।सड़क पर चलते वाहनों के उत्सर्जन की जांच होने से केवल निर्धारित केंद्रों पर होने वाली जांच पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने पर PUC प्रमाणपत्र की भूमिका क्या होगी, यह अंतिम नियमों से स्पष्ट होगा।
अलवर-NCR क्षेत्र पर भी पड़ सकता है असर
दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े इन प्रस्तावों का असर राजस्थान के NCR क्षेत्र में शामिल इलाकों पर भी पड़ सकता है। अलवर और आसपास के क्षेत्रों में वाहन प्रदूषण की निगरानी को लेकर नई व्यवस्था की जरूरत हो सकती है।यदि केंद्र और संबंधित एजेंसियां इन सिफारिशों को लागू करती हैं, तो वाहन मालिकों को केबिन एयर फिल्टर और उत्सर्जन जांच से जुड़े नए मानकों का पालन करना पड़ सकता है।फिलहाल इन प्रस्तावों को लागू करने की अंतिम तारीख, वाहनों की श्रेणियां और तकनीकी मानक तय होने बाकी हैं। ऐसे में वाहन मालिकों को किसी नए नियम को अनिवार्य मानने से पहले आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।
अंतिम फैसले पर टिकी नजर
CAQM की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें वाहन प्रदूषण पर निगरानी और गाड़ियों के भीतर हवा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रस्ताव हैं। लेकिन इन्हें लागू करने से पहले तकनीकी मानकों, जांच प्रक्रिया और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका तय करना जरूरी होगा।अब देखना होगा कि संबंधित प्राधिकरण इन सिफारिशों पर क्या निर्णय लेते हैं और नई व्यवस्था किन वाहनों पर लागू होती है।