जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर खुशबू पाटनी का दावा, बोलीं- ‘यहां सिर्फ शिक्षा की बात हो रही थी’
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन को लेकर अब अभिनेत्री दिशा पाटनी की बहन और पूर्व सेना अधिकारी खुशबू पाटनी का बयान चर्चा में है। उन्होंने दावा किया कि वह अपनी पहचान छिपाकर सामान्य प्रदर्शनकारी की तरह मार्च में शामिल हुई थीं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने अनुभव में उन्होंने प्रदर्शन के माहौल, छात्रों के व्यवहार और पुलिस कार्रवाई का जिक्र किया। खुशबू के दावों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। हालांकि, उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘पहचान छिपाकर छात्रों के बीच पहुंची थी’
खुशबू पाटनी ने बताया कि वह बिना किसी विशेष पहचान के प्रदर्शन में शामिल होना चाहती थीं, ताकि वास्तविक स्थिति को करीब से समझ सकें। उनके अनुसार, उन्होंने मास्क और कैप पहनकर आम प्रदर्शनकारी की तरह पूरे मार्च में हिस्सा लिया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र मौजूद होने के बावजूद वहां का माहौल व्यवस्थित था। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने अनुशासन बनाए रखा और विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान का ध्यान रखा।
‘प्रदर्शन में शिक्षा के मुद्दे पर ही नारे लगे’
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो का हवाला देते हुए खुशबू पाटनी ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान केवल शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर नारे लगाए जा रहे थे। उनके अनुसार, आंदोलन का केंद्र बिंदु छात्रों की मांगें थीं और किसी भी तरह के सांप्रदायिक या असंबंधित नारे सुनाई नहीं दिए। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव के मुताबिक प्रदर्शन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करना था। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुलिस कार्रवाई में घायल होने का किया दावा
खुशबू पाटनी ने आरोप लगाया कि मार्च के दौरान अचानक पुलिस कार्रवाई शुरू हुई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र-छात्राओं को चोटें आईं और वह स्वयं भी इस दौरान घायल हुईं। उनके मुताबिक, हालात तनावपूर्ण होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने हिंसक प्रतिक्रिया नहीं दी और संयम बनाए रखा। पुलिस कार्रवाई को लेकर उनके बयान उनके व्यक्तिगत अनुभव और दावों पर आधारित हैं।
नई पीढ़ी के अनुशासन की सराहना की
अपने अनुभव साझा करते हुए खुशबू पाटनी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ने उन्हें सकारात्मक रूप से प्रभावित किया। उन्होंने दावा किया कि बड़ी भीड़ होने के बावजूद छात्रों ने शांति और अनुशासन बनाए रखा। उनके अनुसार, प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था फैलाने की कोशिश नहीं की गई और अधिकांश छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाते रहे। उन्होंने युवाओं के धैर्य और जिम्मेदार व्यवहार की सराहना करते हुए इसे लोकतांत्रिक विरोध का उदाहरण बताया।
छात्र आंदोलन पर बढ़ रही सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं
दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर विभिन्न क्षेत्रों से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई सार्वजनिक हस्तियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और संवाद की आवश्यकता पर अपनी राय रखी है। वहीं, इस पूरे विवाद को लेकर सरकार, विपक्ष और आंदोलनकारी संगठनों के बीच अलग-अलग दावे और आरोप भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना बनी हुई है।