खैरथल सियासत: सभापति पद को लेकर ‘15 करोड़’ बनाम ‘15 पार्षद’ का घमासान, वायरल ऑडियो ने बढ़ाया विवाद
अलवर के खैरथल नगर परिषद में सभापति पद के चुनाव के बाद सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। भाजपा के नवनिर्वाचित सभापति विक्रम सिंह चौधरी ने कांग्रेस के मुंडावर विधायक ललित यादव पर सभापति बनाने के बदले 10 से 15 करोड़ रुपये की मांग का गंभीर आरोप लगाया है। इस दावे के समर्थन में एक कथित ऑडियो क्लिप भी सामने आई है, जिसमें ’10 से 15′ का जिक्र है। वहीं, विधायक ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि यह संख्या पार्षदों की थी, रुपये की नहीं। इस ‘ऑडियो विवाद’ ने खैरथल की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है।
कथित ऑडियो और 15 करोड़ के गंभीर आरोप
नवनिर्वाचित सभापति विक्रम सिंह चौधरी ने खुद को और विधायक ललित यादव के बीच हुई एक बातचीत का कथित ऑडियो सार्वजनिक किया है। चौधरी का दावा है कि इस ऑडियो में स्पष्ट रूप से 10 से 15 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जिसे पूरा करना उनके लिए असंभव था। इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा के साथ जाने और सभापति पद संभालने का फैसला किया। इस ऑडियो में सुनाई देने वाले ’10 कम से कम और 15 ज्यादा से ज्यादा’ वाले वाक्यांश को चौधरी सीधे तौर पर मोटे धन के लेन-देन से जोड़ रहे हैं, जिसने स्थानीय प्रशासन और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विधायक ललित यादव का पलटवार: ‘15’ पार्षदों की संख्या थी
कांग्रेस विधायक और चुनाव प्रचार समिति के चेयरमैन ललित यादव ने विक्रम चौधरी के सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और झूठा करार दिया है। यादव का स्पष्टीकरण है कि बातचीत जरूर हुई थी, लेकिन उसमें धनराशि का जिक्र कतई नहीं था। उनके अनुसार, ऑडियो में जिस ’10 से 15′ की बात हो रही है, वह पार्षदों की संख्या को दर्शाती है, न कि करोड़ों रुपये को। यादव ने इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक प्रतिशोध और बदनामी की साजिश बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता समीकरण बनाने की सामान्य राजनीतिक चर्चा को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
विक्रम चौधरी का सियासी सफर: कांग्रेस से भाजपा तक
इस विवाद को समझने के लिए विक्रम सिंह चौधरी के राजनीतिक इतिहास को जानना आवश्यक है। वे खैरथल नगर परिषद चुनाव में मूल रूप से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुने गए थे और पिछले बोर्ड में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। ‘खैरथल जिला बचाओ आंदोलन’ में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। हालांकि, चुनावी नतीजों के बाद अचानक समीकरण बदल गए। चौधरी ने कांग्रेस से गठजोड़ तोड़ते हुए अपने साथ 11 पार्षदों को भाजपा में शामिल करवाया और सभापति की कुर्सी हासिल की। यह अचानक बदलाव ही वर्तमान आरोप-प्रत्यारोप की जड़ माना जा रहा है।
सच्चाई की तह तक पहुंचने की मांग और भविष्य की चुनौती
वर्तमान में खैरथल नगर परिषद की सियासत पूरी तरह से इसी एक सवाल पर अटकी है कि वायरल ऑडियो में ’10 से 15′ का वास्तविक संदर्भ क्या था। कथित ऑडियो की प्रामाणिकता, वॉयस फिंगरप्रिंट और बातचीत के वास्तविक संदर्भ की स्वतंत्र जांच की मांग जोर पकड़ रही है। जब तक तकनीकी जांच से सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक यह ’15 करोड़ बनाम 15 पार्षद’ का विवाद स्थानीय राजनीति का केंद्र बना रहेगा। इस मामले का अंतिम निष्कर्ष न केवल दोनों नेताओं की राजनीतिक छवि, बल्कि खैरथल के भावी प्रशासनिक कार्यकाल को भी प्रभावित करेगा।