कडाणा बांध का पानी बनेगा राजस्थान की जीवनरेखा? 17 किमी दूर जल भंडार से 4 जिलों की प्यास बुझाने की उम्मीद
राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे बाड़मेर, जालोर, सिरोही और जैसलमेर के लिए गुजरात का कडाणा बांध नई उम्मीद बन सकता है। दावा है कि माही परियोजना के तहत राजस्थान के हिस्से का 28 टीएमसी पानी पिछले करीब दो दशकों से उपयोग में नहीं आ रहा और गुजरात की ओर बह रहा है। यदि दोनों राज्यों के बीच समझौता हो जाए तो लाखों लोगों को पेयजल और किसानों को सिंचाई के लिए बड़ी राहत मिल सकती है।
माही परियोजना में तय था राजस्थान का हिस्सा
माही परियोजना की शुरुआत वर्ष 1966 में हुई थी, जबकि 1979 तक गुजरात के कडाणा क्षेत्र में बांध का निर्माण पूरा कर वहां पानी पहुंचा दिया गया। इस परियोजना में कुल 87 टीएमसी जल संग्रहण की व्यवस्था बनाई गई, जिसमें से 28 टीएमसी पानी राजस्थान को मिलने का प्रावधान था। कडाणा बांध राजस्थान की सीमा से महज 17 किलोमीटर दूर स्थित है। योजना के अनुसार यह पानी राजस्थान के सूखा प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जाना था, लेकिन वर्षों बाद भी यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका।
चार जिलों और 650 से ज्यादा गांवों को मिलना था लाभ
परियोजना का उद्देश्य जालोर, सिरोही, बाड़मेर और जैसलमेर के सैकड़ों गांवों और ढाणियों तक नहर के जरिए पानी पहुंचाना था। इसके लिए करीब 337 किलोमीटर लंबी हाई लेवल कैनाल प्रस्तावित की गई थी। जानकारी के अनुसार गुजरात ने अपने क्षेत्र में लगभग 320 किलोमीटर नहर का निर्माण कर लिया, लेकिन राजस्थान तक पानी पहुंचाने के लिए दोनों राज्यों के बीच आवश्यक सहमति नहीं बन सकी। नतीजतन योजना अधूरी रह गई और लाखों लोग आज भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
राजस्थान लगातार उठाता रहा अपने हिस्से के पानी का मुद्दा
राजस्थान में किसानों और जनप्रतिनिधियों ने वर्ष 2007 से लगातार राज्य के हिस्से का पानी दिलाने की मांग उठाई। इसी दौरान खोसला समिति का गठन भी किया गया, जिसने राजस्थान के दावे का समर्थन किया। इसके बावजूद दोनों राज्यों के बीच अंतिम सहमति नहीं बन सकी। समय-समय पर यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उठता रहा, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र से किया था हस्तक्षेप का आग्रह
18 जून 2024 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर गुजरात से राजस्थान के हिस्से का पानी दिलाने की मांग की थी। इसके बाद दोनों राज्यों के बीच पत्राचार भी हुआ, लेकिन अभी तक किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में सहमति बनती है तो पश्चिमी राजस्थान के जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
खंभात की खाड़ी में बह रहा पानी, समझौते से मिल सकती है राहत
बताया जाता है कि उपयोग नहीं होने वाला बड़ी मात्रा में पानी अंततः खंभात की खाड़ी की ओर बह जाता है। जल विशेषज्ञों का मानना है कि यह मात्रा जवाई बांध जैसे चार बड़े जलाशयों को भरने के बराबर हो सकती है। यदि राजस्थान और गुजरात के बीच जल बंटवारे पर सहमति बनती है तो यह पानी पश्चिमी राजस्थान के लिए दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकता है। हालांकि इसके लिए दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के स्तर पर औपचारिक निर्णय और परियोजना का क्रियान्वयन आवश्यक होगा।