#राज्य-शहर

राजस्थान: निर्दलीय MLA गणेशराज बंसल को कोर्ट ने भेजा जेल, 23 साल पुराने पट्टा प्रकरण में कार्रवाई

हनुमानगढ़ के निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को 23 साल पुराने पट्टा और जमीन विवाद से जुड़े मामले में कोर्ट से राहत नहीं मिली। चार दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद सीआईडी-सीबी ने उन्हें शुक्रवार को हनुमानगढ़ की सीजेएम कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए दोबारा पुलिस रिमांड मांगी, लेकिन कोर्ट ने मांग खारिज कर दी। इसके बाद गणेशराज बंसल को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

चार दिन की रिमांड के बाद कोर्ट में पेश हुए विधायक

सीआईडी-सीबी और स्पेशल क्राइम ब्रांच की टीम ने 20 सितंबर को गणेशराज बंसल को हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अदालत ने जांच एजेंसी को पुलिस रिमांड दी थी।21 सितंबर को कोर्ट ने विधायक को 25 सितंबर तक पुलिस रिमांड में भेजा था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद शुक्रवार को उन्हें सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया।

दोबारा रिमांड की मांग कोर्ट ने नहीं मानी

सीआईडी-सीबी ने मामले में आगे पूछताछ के लिए गणेशराज बंसल की दोबारा पुलिस रिमांड मांगी। जांच एजेंसी का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने दोबारा रिमांड देने से इनकार कर दिया।इसके बाद अदालत ने विधायक को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए। अब मामले में आगे की जांच सीआईडी-सीबी के स्तर पर जारी रहेगी और कानूनी प्रक्रिया अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ेगी।

2003 के पट्टा प्रकरण से जुड़ा है मामला

यह मामला वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ नगर परिषद की ओर से जारी किए गए कथित पट्टों और जमीन से जुड़े विवाद से संबंधित है।मामले में गणेशराज बंसल, उनकी पत्नी और नगर परिषद से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसी प्रकरण में सीआईडी-सीबी ने विधायक को गिरफ्तार किया था।जांच एजेंसी अब कथित पट्टा जारी करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

गिरफ्तारी के बाद नगर परिषद चुनाव के बीच बढ़ी हलचल

गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई, जब हनुमानगढ़ नगर परिषद में सभापति पद को लेकर चुनावी गतिविधियां चल रही थीं।विधायक समर्थित निर्दलीय पार्षदों की संख्या स्थानीय निकाय के समीकरण में महत्वपूर्ण बताई जा रही थी। गिरफ्तारी के बाद विधायक समर्थकों और निर्दलीय पार्षदों की ओर से विरोध जताए जाने की जानकारी सामने आई।इस घटनाक्रम का असर स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों पर भी देखने को मिला।

हाईकोर्ट की अंतरिम राहत अलग मामले में थी

गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी के दौरान उनके खिलाफ दर्ज एक अन्य एफआईआर भी चर्चा में रही। विधायक ने अपनी पत्नी संतोष बंसल और बेटी वंदना जैन के साथ राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया था।इन अलग-अलग एफआईआर के मामले में हाईकोर्ट ने तीनों के खिलाफ गिरफ्तारी और दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई थी। विधायक के खिलाफ एफआईआर संख्या 625 में कथित धोखाधड़ी के आरोप बताए गए थे।याचिका में यह भी कहा गया था कि संबंधित घटनाक्रम वर्ष 2003 का है, जबकि एफआईआर 2026 में दर्ज की गई।

मौजूदा जेल भेजने की कार्रवाई अलग प्रकरण में

हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत और मौजूदा पट्टा प्रकरण की कार्रवाई को अलग-अलग समझना जरूरी है।वर्तमान घटनाक्रम में सीआईडी-सीबी ने जिस मामले में गणेशराज बंसल को गिरफ्तार किया था, उसी मामले में पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें शुक्रवार को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया।अदालत ने दोबारा पुलिस रिमांड नहीं दी और न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया।

अब आगे क्या होगा?

गणेशराज बंसल के जेल जाने के बाद सीआईडी-सीबी की जांच जारी रहेगी। जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों, पट्टा जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर सकती है।मामले में आगे की कार्रवाई जांच की प्रगति और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगी। विधायक को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जाना मामले की जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति तय नहीं होती।

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *