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जोधपुर: उद्घाटन के 2 महीने बाद भी बंद क्रिटिकल केयर ब्लॉक, अशोक गहलोत ने CM भजनलाल से की अपील

जोधपुर के मंडोर जिला अस्पताल में 30.50 करोड़ रुपये की लागत से बना 50 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक उद्घाटन के करीब दो महीने बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी दूर कर ब्लॉक को जल्द शुरू कराने की अपील की। गहलोत के अनुसार, अस्पताल में रोजाना करीब 1,100 मरीज ओपीडी में आते हैं। ऐसे में नई चिकित्सा सुविधा शुरू नहीं होने से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

उद्घाटन के बाद भी शुरू नहीं हुआ क्रिटिकल केयर ब्लॉक

जोधपुर के मंडोर स्थित जिला अस्पताल में पांच मंजिला क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाया गया है। इसकी लागत करीब 30.50 करोड़ रुपये बताई गई है। इस ब्लॉक में गंभीर मरीजों के उपचार के लिए 50 बेड की व्यवस्था की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 16 अगस्त 2026 को इसका उद्घाटन किया था। हालांकि, उद्घाटन के करीब दो महीने बाद भी इसके संचालन का इंतजार बना हुआ है। अस्पताल में इस नई सुविधा के शुरू होने से गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद थी।

अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अस्पताल की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार उद्घाटन और प्रचार पर ध्यान दे रही है, लेकिन मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही। गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने जनहित में इस भवन का निर्माण करवाया था। उनके मुताबिक, भवन तैयार होने के बावजूद इसका संचालन शुरू नहीं होना चिंता का विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से क्रिटिकल केयर ब्लॉक को जल्द शुरू कराने की अपील की।

अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी

गहलोत ने अस्पताल में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, अस्पताल में स्वीकृत 34 डॉक्टरों के मुकाबले केवल 18 डॉक्टर कार्यरत हैं। वहीं, क्रिटिकल केयर ब्लॉक के संचालन के लिए 65 नर्सिंग अधिकारियों की जरूरत बताई गई है, जबकि फिलहाल 46 नर्सिंग अधिकारी कार्यरत हैं। इसके अलावा, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी भी बताई गई है। पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता किसी भी गंभीर चिकित्सा इकाई के संचालन के लिए जरूरी होती है। ऐसे में रिक्त पदों को भरना और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

रोजाना करीब 1100 मरीज पहुंचते हैं अस्पताल

मंडोर जिला अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अशोक गहलोत के अनुसार, अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1,100 मरीज आते हैं। ऐसे में क्रिटिकल केयर ब्लॉक शुरू होने से मरीजों को अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं मिल सकती हैं। गंभीर मरीजों के उपचार में समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ब्लॉक शुरू होने में देरी के कारण अस्पताल की नई सुविधा का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि, इसके संचालन की वास्तविक स्थिति और देरी के कारणों पर अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है।

स्टाफ की कमी दूर करने के लिए सरकार को भेजी गई सूचना

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्रिटिकल केयर ब्लॉक के संचालन के लिए अतिरिक्त नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत है। अस्पताल प्रशासन की ओर से रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार को सूचना भेजे जाने की बात कही गई है। फिलहाल कर्मचारियों की उपलब्धता और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के कारण ब्लॉक शुरू होने का इंतजार बना हुआ है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग रिक्त पदों को भरने तथा आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

48 साल पहले भामाशाह ने उपलब्ध कराई थी जमीन और भवन

मंडोर अस्पताल का नाम भामाशाह शिवराम नत्थूजी टाक के नाम पर रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने करीब 48 साल पहले अस्पताल के लिए भूमि और भवन उपलब्ध करवाए थे। अस्पताल क्षेत्र के लोगों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र रहा है। ऐसे में नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक का संचालन शुरू होना स्थानीय मरीजों के लिए राहत भरा कदम हो सकता है। फिलहाल इस सुविधा के शुरू होने और कर्मचारियों की कमी दूर करने को लेकर लोगों की नजर सरकार के अगले कदम पर है।

मुख्यमंत्री से जल्द ब्लॉक शुरू कराने की अपील

अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया है कि अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और अन्य जरूरी कर्मचारियों की नियुक्ति जल्द की जाए। साथ ही, क्रिटिकल केयर ब्लॉक का संचालन शुरू कर मरीजों को इसका लाभ दिया जाए। अब मुख्य सवाल यह है कि उद्घाटन के बाद बंद पड़ी इस सुविधा को शुरू करने में कितना समय लगेगा। कर्मचारियों की नियुक्ति और आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद ही मरीजों को नई चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

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Stv News Rajasthan

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