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जोधपुर आयुर्वेद विश्वविद्यालय मामला: असिस्टेंट प्रोफेसर के बाद अब प्रिंसिपल पर कार्रवाई की तैयारी

जोधपुर के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में छात्राओं से कथित यौन उत्पीड़न के मामले में जांच कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। जांच के दौरान 30 विद्यार्थियों के बयान दर्ज किए गए। वहीं, चार छात्राओं ने मोबाइल चैट के स्क्रीनशॉट भी पेश किए। आरोपी यूटीबी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजीत सिंह चारण को पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन उनका पंजीकरण रद्द कराने के लिए संबंधित बोर्ड को रिपोर्ट भेजने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, पर्यवेक्षण में कथित लापरवाही के चलते कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. चंद्रभान शर्मा पर भी कार्रवाई की संभावना है।

30 विद्यार्थियों के बयान, चार छात्राओं ने दिए चैट स्क्रीनशॉट

जोधपुर स्थित राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस कॉलेज में छात्राओं से दुर्व्यवहार की शिकायतों की जांच पूरी कर ली गई है। जांच कमेटी के सामने 30 विद्यार्थियों ने अपने बयान दर्ज कराए। वहीं, चार छात्राओं ने शिकायत के समर्थन में मोबाइल चैट के स्क्रीनशॉट प्रस्तुत किए।शिकायतों के अनुसार, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजीत सिंह चारण छात्राओं से व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर आपत्तिजनक बातचीत करते थे। उन पर निजी संबंध बनाने का दबाव डालने और इनकार करने पर परीक्षा में फेल करने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। जांच कमेटी ने इन शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है।

आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर का पंजीकरण रद्द कराने की तैयारी

विश्वविद्यालय प्रशासन अब जांच रिपोर्ट इंडियन मेडिसिन बोर्ड को भेजने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर का पंजीकरण रद्द कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाना है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरण की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।मामले में एक छात्रा की ओर से एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद करवड़ थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 10 अक्टूबर को डॉ. चारण को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई।

प्रिंसिपल डॉ. चंद्रभान शर्मा पर भी कार्रवाई संभव

जांच के दौरान कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. चंद्रभान शर्मा के खिलाफ कोई सीधी शिकायत सामने नहीं आने की जानकारी दी गई है। हालांकि, मामले की निगरानी और पर्यवेक्षण में लापरवाही की बात सामने आने के बाद प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रहा है।जानकारी के अनुसार, उन्हें पद से हटाकर आयुर्वेद फैकल्टी के किसी प्रोफेसर को प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इस संबंध में अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन को लेना है। फिलहाल, प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी को जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों और प्रशासनिक निर्णय से जोड़कर देखा जा रहा है।

कुलगुरु ने कॉलेजों का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से किया संवाद

मामले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. गोविंद सहाय शुक्ल ने नेचुरोपैथी, होम्योपैथी, बीएससी नर्सिंग और आयुर्वेद कॉलेजों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया।नेचुरोपैथी कॉलेज में विद्यार्थियों की शिकायतें दर्ज करने के लिए ‘कुलगुरु संवाद’ बॉक्स लगाया गया है। विद्यार्थी इसमें अपनी शिकायतें डाल सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुलगुरु तीन दिन बाद स्वयं बॉक्स खोलकर शिकायतों को देखेंगे। अन्य कॉलेजों में भी इसी तरह के बॉक्स लगाने की योजना है।

छात्राओं के लिए महिला शिक्षकों को बनाया मेंटर

विश्वविद्यालय प्रशासन ने नेचुरोपैथी कॉलेज में कुछ छात्राओं के लिए महिला शिक्षकों को मेंटर नियुक्त किया है। इसका उद्देश्य छात्राओं को अपनी समस्याएं और शिकायतें साझा करने के लिए सहज माध्यम उपलब्ध कराना है।इस मामले के बाद विश्वविद्यालय में शिकायतों के निस्तारण और विद्यार्थियों से संवाद की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अब जांच रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को भेजे जाने और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। छात्राओं की शिकायतों पर पुलिस जांच और विश्वविद्यालय की कार्रवाई के परिणाम महत्वपूर्ण रहेंगे।

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Stv News Rajasthan

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