बूंदी में 24 घंटे के नवजात को मिला जीवनदान, एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन से बची जान
राजस्थान के बूंदी जिला अस्पताल में गंभीर पीलिया से पीड़ित 24 घंटे के नवजात का सफल एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन किया गया। जन्म के अगले ही दिन बच्चे में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने से उसकी हालत गंभीर हो गई थी। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार का निर्णय लिया। वरिष्ठ डॉक्टरों के निर्देशन में मेडिकल टीम ने रक्त विनिमय की प्रक्रिया पूरी की। ब्लड बैंक के समन्वय से दो रक्तदाताओं ने भी सहयोग किया। अस्पताल के अनुसार, उपचार के बाद नवजात की स्थिति सुरक्षित है और उसे विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU) में निगरानी में रखा गया है।
जन्म के अगले दिन बिगड़ी नवजात की हालत
बूंदी जिले के दौलतपुरा रामनगर निवासी मनभर और रोहित बंजारा के परिवार में बच्चे के जन्म से खुशियां थीं। लेकिन जन्म के महज 24 घंटे बाद नवजात गंभीर पीलिया की चपेट में आ गया। बच्चे के शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने से उसकी त्वचा पीली पड़ने लगी। परिजन उसे लेकर बूंदी जिला अस्पताल पहुंचे। नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तुरंत उपचार शुरू किया। समय पर उचित इलाज देना जरूरी था, क्योंकि बिलीरुबिन का अत्यधिक स्तर नवजात के मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है।
वरिष्ठ चिकित्सकों के निर्देशन में हुआ उपचार
नवजात की स्थिति को देखते हुए प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. गोविंद गुप्ता और उप नियंत्रक डॉ. आर.के. काबरा ने एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन कराने का निर्णय लिया। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. दीक्षा शोक, यूनिट हेड डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. जी.एस. कुशवाह और डॉ. उमाशंकर सैनी ने प्रक्रिया की तैयारी में भूमिका निभाई। इसके बाद रेजिडेंट डॉक्टरों की टीम ने नवजात की निगरानी करते हुए रक्त विनिमय की प्रक्रिया पूरी की। टीम में डॉ. संतोष, डॉ. तहसीन, डॉ. सागर, डॉ. कौशल गोहिल और डॉ. झील शामिल रहे। एसएनसीयू प्रभारी रितेश सोनी ने भी निगरानी में सहयोग किया।
दो रक्तदाताओं ने समय पर किया सहयोग
इस उपचार में ब्लड बैंक की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। ब्लड बैंक प्रभारी नारायण सिंह हाड़ा के समन्वय से नैनवां रोड निवासी मानवेन्द्र सिंह हाड़ा और नगर परिषद निवासी कमल शर्मा ने रक्तदान किया। समय पर रक्त उपलब्ध होने से चिकित्सकीय प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, उपचार के बाद नवजात की स्थिति सुरक्षित है और उसे एसएनसीयू में निगरानी में रखा गया है। परिजनों ने इलाज में जुटी मेडिकल टीम और रक्तदाताओं के प्रति आभार जताया।
क्या होता है एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन?
एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन एक विशेष चिकित्सा प्रक्रिया है। इसमें मरीज के रक्त की थोड़ी-थोड़ी मात्रा निकालकर उसकी जगह डोनर का उपयुक्त रक्त चढ़ाया जाता है। नवजात शिशुओं में गंभीर पीलिया की कुछ स्थितियों में यह प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसका उद्देश्य रक्त में बिलीरुबिन का स्तर कम करना और जरूरत पड़ने पर हानिकारक एंटीबॉडी तथा प्रभावित लाल रक्त कोशिकाओं को हटाना है। यह प्रक्रिया विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में की जाती है। नवजात की स्थिति के अनुसार उपचार का निर्णय लिया जाता है।
समय पर इलाज क्यों है जरूरी?
नवजात शिशुओं में बिलीरुबिन का स्तर बहुत अधिक बढ़ने पर गंभीर जटिलताओं का खतरा हो सकता है। कुछ मामलों में बिलीरुबिन मस्तिष्क तक पहुंचकर स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जन्म के बाद बच्चे में पीलिया के लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। त्वचा या आंखों में पीलापन बढ़ने, बच्चे के दूध कम पीने या असामान्य सुस्ती जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और डॉक्टरों की सलाह से गंभीर स्थिति का उचित उपचार किया जा सकता है।