चीन को सबसे बड़ी चुनौती मान रहा जापान, 81 साल पुरानी रक्षा नीति में बदलाव के संकेत
एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य और रणनीतिक सक्रियता के बीच जापान अब अपनी दशकों पुरानी रक्षा नीति पर पुनर्विचार करता दिखाई दे रहा है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने साफ संकेत दिए हैं कि देश को केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करनी होगी और बदलते वैश्विक माहौल के अनुसार नई रणनीति अपनानी होगी।
चीन की बढ़ती ताकत को बताया गंभीर चुनौती
जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने कहा है कि क्षेत्रीय सुरक्षा के मौजूदा हालात में चीन की बढ़ती शक्ति जापान के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बनकर उभरी है। उनका मानना है कि संभावित खतरों से निपटने के लिए देश को अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत प्रतिरोध क्षमता ही भविष्य में किसी बड़े संघर्ष को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
अमेरिका पर निर्भरता कम करने के संकेत
कोइजुमी ने कहा कि जापान को अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जापान क्षेत्रीय स्थिरता में अपनी स्वतंत्र भूमिका निभा सकता है और उसे अपने हितों की रक्षा के लिए आत्मनिर्भर रणनीति अपनानी होगी। माना जा रहा है कि बदलते वैश्विक समीकरण और अमेरिकी नीतियों में आए बदलावों ने टोक्यो को नई सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
युद्ध रोकने के लिए बढ़ाई जा रही सैन्य क्षमता
जापानी रक्षा मंत्री के अनुसार सैन्य ताकत बढ़ाने का उद्देश्य युद्ध को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि संभावित संघर्षों को रोकना है। उन्होंने कहा कि समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाए रखा जा सके। जापान बीते कुछ वर्षों में रक्षा बजट बढ़ाने के साथ नई सैन्य साझेदारियों पर भी काम कर रहा है।
हथियार निर्यात में भी बदल रहा है जापान का रुख
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लंबे समय तक हथियार निर्यात पर सख्त प्रतिबंध रखने वाला जापान अब इस नीति में भी बदलाव कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया जापानी युद्धपोतों में रुचि दिखा चुका है, जबकि फिलीपींस, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड के साथ भी रक्षा सहयोग को लेकर बातचीत चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जापान की बदलती रणनीतिक सोच का हिस्सा है।
81 साल बाद संविधान संशोधन पर चर्चा तेज
जापान के संविधान का अनुच्छेद-9 देश को शांतिवादी सिद्धांतों के तहत युद्ध से दूर रहने के लिए प्रतिबद्ध करता है। हालांकि शिंजिरो कोइजुमी ने कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए इस प्रावधान पर पुनर्विचार जरूरी हो गया है। उनका मानना है कि यदि जापान को शांति बनाए रखनी है तो उसे समय के साथ अपनी नीतियों में बदलाव भी करना होगा।
अमेरिका-जापान संबंध अब भी रहेंगे अहम
हालांकि जापान आत्मनिर्भर रक्षा नीति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अमेरिका के साथ उसका रणनीतिक गठबंधन अभी भी उसकी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा। वर्तमान में जापान में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात हैं, जो दोनों देशों के मजबूत रक्षा संबंधों का प्रतीक माने जाते हैं।