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ईरान-अमेरिका समझौते पर जयराम रमेश का हमला, बोले- मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठे सवाल

ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बाद देश की राजनीति में भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस समझौते में पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे भारत के लिए गंभीर भू-राजनीतिक संकेत बताया।

शांति समझौते के बाद कांग्रेस ने उठाए राजनीतिक सवाल

ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता क्षेत्रीय राजनीति में उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। रमेश के मुताबिक, यह बदलाव भारत की विदेश नीति के लिए चिंता का विषय हो सकता है और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

पाकिस्तान की भूमिका को लेकर जताई चिंता

जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान धीरे-धीरे पश्चिम एशिया के सुरक्षा और रणनीतिक ढांचे में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। उनके अनुसार, इस बदलाव के दूरगामी असर भारत पर भी पड़ सकते हैं। कांग्रेस नेता का मानना है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय समीकरण बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अगले कुछ सप्ताह को बताया अहम

कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की गलतफहमी पैदा होती है तो स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो सकती है। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह इस समझौते की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

ईरान की मजबूती का किया जिक्र

अपने बयान में जयराम रमेश ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद ईरान ने अपनी राजनीतिक और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों ने इस समझौते का सावधानी के साथ स्वागत किया है और संभव है कि वे भविष्य में अपने क्षेत्रीय संबंधों की नई समीक्षा करें।

इजरायल नीति को लेकर भी सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के साथ भारत के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा विदेश नीति के कुछ फैसलों का असर भारत के व्यापक रणनीतिक हितों पर पड़ सकता है। हालांकि यह कांग्रेस का राजनीतिक दृष्टिकोण है और सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विदेश नीति को लेकर बढ़ सकती है सियासी बहस

ईरान-अमेरिका समझौते के बाद अब देश में विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार की रणनीति पर सवाल उठा रहा है, वहीं आने वाले दिनों में केंद्र की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

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