जयपुर MNIT कैंपस में मिला तेंदुए के शावक का शव, झालाना का ‘किंग’ राणा भी एक महीने से लापता
जयपुर के MNIT कैंपस के पीछे जंगल में 7 से 8 महीने के तेंदुए के शावक का शव मिला है। शुरुआती जानकारी में मौत की वजह प्राकृतिक होने की बात कही जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि बाकी है। शव स्मृतिवन में रहने वाली मादा लेपर्ड पूजा के क्षेत्र में मिला। वहीं, झालाना लेपर्ड रिजर्व का चर्चित तेंदुआ राणा पिछले एक महीने से लापता है। वन विभाग उसकी तलाश में 48 कैमरा ट्रैप और चार टीमें लगा चुका है। दूसरी ओर, चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में तारबंदी में फंसने से एक मादा लेपर्ड की मौत हो गई।
MNIT कैंपस के पीछे जंगल में मिला शावक का शव
जयपुर के मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNIT) परिसर के पीछे जंगल में तेंदुए के शावक का शव मिलने से वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, शावक की उम्र करीब 7 से 8 महीने थी। शव स्मृतिवन में रहने वाली मादा लेपर्ड पूजा के टेरिटरी क्षेत्र में मिला।शव मिलने के बाद वन विभाग ने मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम कराया। प्रारंभिक जानकारी में मौत की वजह प्राकृतिक होने की बात सामने आई है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।
झालाना का चर्चित तेंदुआ राणा एक महीने से लापता
जयपुर के झालाना लेपर्ड रिजर्व का चर्चित नर तेंदुआ राणा भी वन विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। उसे आखिरी बार 25 सितंबर 2026 को शाम की सफारी के दौरान देखा गया था। इसके बाद उसकी कोई नई तस्वीर या स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। 26 अक्टूबर तक उसे देखे हुए 31 दिन हो चुके हैं।राणा को झालाना जंगल का प्रभावशाली नर तेंदुआ यानी डोमिनेंट मेल माना जाता है। सफारी पर आने वाले पर्यटकों के बीच भी उसकी खास पहचान रही है। वह अक्सर पर्यटकों की गाड़ियों के सामने आ जाता था। उसकी सहज मौजूदगी के कारण उसे झालाना का ‘किंग’ और ‘हीरो’ भी कहा जाता है।
48 कैमरा ट्रैप से राणा की तलाश
राणा का पता लगाने के लिए वन विभाग ने झालाना और आमागढ़ के जंगलों में करीब 48 कैमरा ट्रैप लगाए हैं। ये कैमरे उन रास्तों और जलस्रोतों के आसपास लगाए गए हैं, जहां तेंदुओं की आवाजाही होने की संभावना रहती है।इसके अलावा वन विभाग की चार टीमें जंगल के अलग-अलग हिस्सों में तलाश अभियान चला रही हैं। हालांकि, लगातार प्रयासों के बावजूद राणा की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हो पाई है। उसकी तलाश जारी है और वन विभाग को कैमरा ट्रैप से मिलने वाले संभावित संकेतों का इंतजार है।
चित्तौड़गढ़ में तारबंदी में फंसने से मादा लेपर्ड की मौत
इधर, चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र के नाथू रामजी का खेड़ा गांव में भी एक मादा लेपर्ड की मौत का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, खेत के चारों ओर लगी लोहे की जालीदार तारबंदी में फंसने से उसकी जान चली गई।रविवार सुबह करीब 9 बजे एक ग्रामीण ने लेपर्ड की दहाड़ और छटपटाने की आवाज सुनी। मौके पर पहुंचने पर मादा लेपर्ड तारों में बुरी तरह उलझी मिली। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। दोपहर करीब 12 बजे रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और उसे तारों से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
जयपुर में शावक का शव मिलना, झालाना के राणा का लंबे समय से नजर नहीं आना और बेगूं में तारबंदी में फंसकर मादा लेपर्ड की मौत होना वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को सामने लाता है।जहां जयपुर में शावक की मौत के कारणों की पुष्टि का इंतजार है, वहीं राणा की तलाश जारी है। बेगूं की घटना में खेतों के आसपास लगी तारबंदी वन्यजीवों के लिए जोखिम का कारण बनी। ऐसे मामलों में वन विभाग की निगरानी के साथ वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में सुरक्षित इंतजाम भी महत्वपूर्ण हैं।