Jaipur Accident: ट्रेलर हादसे ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, ICU में भर्ती कैलाशी की जुबां पर सिर्फ एक दर्द—’बहुत दर्द है’
जयपुर के अजमेर रोड पर हुए भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां पलभर में छीन लीं। इस दुर्घटना में महिला के पति और तीन मासूम बेटों की मौत हो गई, जबकि वह स्वयं गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। उसकी एक पंक्ति—”बहुत दर्द है”—इस हादसे की भयावहता और उसके टूट चुके संसार को बयां करती है।
ICU में जिंदगी की जंग लड़ रही कैलाशी
जयपुर के एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कैलाशी गंभीर चोटों के कारण उपचाराधीन है। दोनों पैरों में फ्रैक्चर होने के कारण स्टील रॉड लगाई गई हैं और एक हाथ पर भी गंभीर चोट के चलते प्लास्टर व पट्टी की गई है। दर्द से कराह रही कैलाशी मुश्किल से आंखें खोल पाती है। जब उससे हालचाल पूछा गया तो उसने धीमी आवाज में केवल इतना कहा—”बहुत दर्द है”। यह दर्द केवल शारीरिक नहीं, बल्कि अपने पूरे परिवार को खो देने की असहनीय पीड़ा भी है।
एक ही हादसे में पति और तीन मासूम बेटों की मौत
7 जुलाई को अजमेर रोड 200 फीट बाइपास पर हुए भीषण ट्रेलर हादसे में कैलाशी के पति चंद्र प्रकाश बागरी और उनके तीन बेटे—11 वर्षीय रमेश, 10 वर्षीय गोपाल और 8 वर्षीय दीपक की मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे परिवार की खुशियां उजड़ गईं। गांव में जब पिता और तीनों बेटों की अर्थियां एक साथ उठीं तो हर आंख नम हो गई। इस हादसे के बाद कैलाशी अकेली बची हैं और अस्पताल में उपचार करा रही हैं।
दिनभर अकेले दर्द से जूझ रही महिला
अस्पताल में दिन के समय कैलाशी के पास कोई करीबी मौजूद नहीं रहता। केवल एक महिला उनकी देखभाल करती है, जबकि रिश्तेदार शाम को अस्पताल पहुंचते हैं। पूरे दिन वह अस्पताल के बिस्तर पर अकेले दर्द सहती रहती हैं। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और आवश्यक इलाज जारी है। परिवार को खोने का मानसिक आघात भी उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मेहनत से चल रहा था परिवार, हादसे ने सब खत्म कर दिया
चंद्र प्रकाश बागरी जयपुर के वैशाली नगर क्षेत्र में परिवार के साथ रहते थे और खजूर की झाड़ू बनाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर बेहतर भविष्य देना चाहते थे। लेकिन सड़क हादसे ने उनके सभी सपनों को पलभर में खत्म कर दिया। अब परिवार की एकमात्र सदस्य कैलाशी अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनका भविष्य भी अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है।
हादसे ने छोड़ा गहरा जख्म
यह दुर्घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार के बिखर जाने की दर्दनाक कहानी बन गई है। चिकित्सकों का प्रयास कैलाशी के शारीरिक घावों को भरने का है, लेकिन पति और तीन बच्चों को खोने का मानसिक आघात शायद जीवनभर उनके साथ रहेगा। यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
यह भी पढ़ें –दतिया उपचुनाव में विरोध के बीच भाजपा का भरोसा, कैलाश बोले- भारी मतों से जीतेंगे आशुतोष