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इजरायल का सख्त रुख: लेबनान से सेना वापसी नहीं, सीजफायर पर बढ़ा तनाव

लेबनान में जारी संघर्ष विराम के बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक तनाव फिर बढ़ गया है। इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्र से अपनी सेना नहीं हटाएगा। इस बयान के बाद सीजफायर को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय कोशिशों पर नया दबाव बन गया है।

दक्षिणी लेबनान पर इजरायल की ‘रेड लाइन’

Israel के विदेश मंत्री गिदोन सार ने स्पष्ट किया है कि देश दक्षिणी लेबनान में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और इसे किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। इजरायल का तर्क है कि सीमा क्षेत्र में मौजूद खतरे को देखते हुए सेना की मौजूदगी जरूरी है ताकि नागरिकों को संभावित हमलों से बचाया जा सके।

हिजबुल्लाह पर इजरायल का आरोप

इजरायल ने एक बार फिर Hezbollah को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इजरायली विदेश मंत्री का कहना है कि यह संगठन न सिर्फ इजरायल के लिए बल्कि लेबनान की आंतरिक स्थिरता के लिए भी गंभीर खतरा है। इजरायल का दावा है कि हिजबुल्लाह की गतिविधियों के कारण क्षेत्र में लंबे समय से अस्थिरता बनी हुई है, और जब तक इसका प्रभाव खत्म नहीं होता, तब तक सुरक्षा स्थिति सामान्य नहीं हो सकती।

अमेरिका की मध्यस्थता और नई संभावनाएं

कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदार यह कोशिश कर रहे हैं कि इजरायल और लेबनान के बीच कुछ इलाकों में नियंत्रण को लेकर समझौता हो सके। चर्चा इस बात पर भी है कि अगर लेबनानी सेना सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती है, तो इजरायली सेना कुछ क्षेत्रों से पीछे हट सकती है। हालांकि इस पर अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है।

इजरायल के भीतर भी मतभेद

Israel की राजनीतिक व्यवस्था में भी इस मुद्दे पर एक राय नहीं है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कुछ सहयोगी मानते हैं कि किसी भी प्रकार की वापसी या नरमी सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकती है। यही वजह है कि नीति को लेकर अंदरूनी बहस भी जारी है।

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