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अमेरिकी-इसराइली हमलों से ईरान को बड़ा नुकसान, 50 से अधिक सैन्य ठिकाने क्षतिग्रस्त होने का दावा

सैटेलाइट तस्वीरों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इसराइल के सैन्य हमलों में ईरान के 50 से अधिक सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिनमें आईआरजीसी (IRGC) मुख्यालय और कई एयरबेस, नौसैनिक अड्डे व मिसाइल ठिकाने शामिल हैं। बीबीसी वेरिफाई की रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से दावा किया गया है कि इन हमलों ने ईरान की सैन्य संरचना को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, हालांकि ईरान अब भी जवाबी क्षमता बनाए हुए है।

सैटेलाइट तस्वीरों में तबाही के बड़े संकेत

बीबीसी वेरिफाई द्वारा विश्लेषित सैटेलाइट तस्वीरों में ईरान के कई प्रमुख सैन्य ठिकानों पर व्यापक नुकसान के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एयरबेस, बैलिस्टिक मिसाइल ठिकाने और नौसैनिक सुविधाएं हमलों का निशाना बनीं। तस्वीरों में रनवे क्षतिग्रस्त, विमान नष्ट और कई संरचनाओं में विस्फोट के बाद की स्थिति देखी गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह नुकसान आंशिक आकलन है क्योंकि कई सैन्य ठिकानों को गुप्त रखा जाता है और पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है।

आईआरजीसी और नौसेना ठिकानों को गंभीर क्षति

रिपोर्ट के अनुसार इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के मुख्यालय और उससे जुड़े परिसरों को भी हमलों में नुकसान पहुंचा है। बंदर अब्बास और कोनारक जैसे नौसैनिक अड्डों पर जहाजों और इमारतों को गंभीर क्षति हुई है। सैटेलाइट तस्वीरों में कुछ स्थानों पर धुएं के गुबार और तबाही के निशान देखे गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की नौसेना और वायुसेना दोनों को इन हमलों से रणनीतिक झटका लगा है।

वायुसेना और मिसाइल ठिकानों पर भी असर

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मेहराबाद और शिराज जैसे एयरबेस पर दर्जनों सैन्य विमान नष्ट हुए हैं। इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर सुरंगों और लॉन्चिंग साइट्स को भी नुकसान पहुंचा है। तस्वीरों में निर्माण कार्य और मरम्मत गतिविधियां भी देखी गईं, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान युद्धविराम के दौरान अपनी क्षमताओं को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

मानव नुकसान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

कुछ मानवाधिकार संगठनों के अनुसार इस संघर्ष में 1,700 से अधिक नागरिकों की मौत की भी रिपोर्ट सामने आई है, हालांकि इन आंकड़ों पर अलग-अलग मत हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने हजारों लक्ष्यों को निशाना बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है, लेकिन वह ड्रोन और मिसाइल तकनीक के जरिए अब भी जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम है।

रणनीतिक असर और आगे की स्थिति

विशेषज्ञों के अनुसार ईरान की पारंपरिक सैन्य ताकत को नुकसान पहुंचा है, लेकिन उसकी असममित युद्ध क्षमता—जैसे ड्रोन और छोटे जहाजों का बेड़ा—अभी भी सक्रिय है। होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे रणनीतिक क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्थिक प्रतिबंध और सीमित संसाधन ईरान के पुनर्निर्माण प्रयासों को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन अस्थिर युद्धविराम के तहत बनी हुई है।

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