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हॉर्मुज पर ईरान का सख्त रुख, अमेरिकी हमलों के बाद सेना बोली- पीछे नहीं हटेंगे

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच ईरानी सेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सेना के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि बाहरी दबाव या सैन्य कार्रवाई के बावजूद ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। साथ ही उन्होंने शहीदों के खून का बदला लेने की बात भी कही। हालांकि, उनके बयान में अली खामेनेई के संदर्भ से जुड़ा दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है और इस पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

हॉर्मुज पर समझौते से इनकार

ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरामिनिया ने ईरानी मीडिया से बातचीत में कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान की रणनीतिक स्थिति बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी दबाव या सैन्य कार्रवाई से ईरान अपने रुख में बदलाव नहीं करेगा और इस जलमार्ग को लेकर राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

अमेरिकी कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव

यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने की खबरें हैं। दोनों देशों के बीच हालिया घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, इन घटनाओं से जुड़े सभी सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से होना आवश्यक है।

‘शहीदों के खून का बदला लेंगे’

ईरानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि देश अपने शहीदों के बलिदान को नहीं भूलेगा और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने का प्रयास करेगा। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में उनके बयान को अली खामेनेई के संदर्भ से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है, लेकिन इस दावे की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है महत्वपूर्ण?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। इस मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर व्यापक असर डाल सकता है।

क्षेत्रीय हालात पर दुनिया की नजर

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हुई है। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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