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Iran Oil Export Begins: दो महीने बाद फिर शुरू हुआ ईरानी तेल निर्यात, होर्मुज से गुजरे टैंकर

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच ईरान ने करीब दो महीने बाद फिर से कच्चे तेल का निर्यात शुरू कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी क्षेत्र को पार करते हुए कई ईरानी तेल टैंकर आगे बढ़े हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद बदले हालात

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते को लेकर सहमति बनने के बाद क्षेत्रीय तनाव में कमी देखने को मिल रही है। दोनों देशों की ओर से डिजिटल स्तर पर समझौते को मंजूरी दिए जाने की खबरों के बीच 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर प्रस्तावित हैं। इसी प्रक्रिया के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू प्रतिबंधों में ढील दी गई है, जिससे समुद्री व्यापार गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य होने लगी हैं। इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अमेरिकी नाकेबंदी क्षेत्र से गुजरे ईरानी तेल टैंकर

समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने वाली वेबसाइट TankerTrackers के अनुसार, ईरान के तेल से लदे कई जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में उस क्षेत्र को पार कर चुके हैं, जहां पहले अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव था। शुरुआती दो टैंकरों के बाद एक तीसरा जहाज भी इसी मार्ग से आगे बढ़ा। इन गतिविधियों के साथ लगभग दो महीने से रुका हुआ ईरान का तेल निर्यात फिर से शुरू हो गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरानी कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

लाखों बैरल कच्चे तेल के साथ रवाना हुए जहाज

AIS डेटा के मुताबिक, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी (NITC) के दो वीएलसीसी सुपरटैंकर लगभग 38 लाख बैरल कच्चे तेल के साथ आगे बढ़े हैं। इसके अलावा कंपनी का एक स्वेज़मैक्स टैंकर करीब 10 लाख बैरल तेल लेकर नाकेबंदी क्षेत्र से बाहर निकल चुका है। ईरान के विशाल तेल भंडार को देखते हुए निर्यात दोबारा शुरू होना उसके लिए आर्थिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। इससे देश के राजस्व में बढ़ोतरी और ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार को मिल सकती है राहत

पिछले कुछ समय से ईरानी तेल आपूर्ति बाधित होने का असर कई देशों पर देखने को मिला था। भारत समेत अनेक देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई थी। अब युद्धविराम और शांति समझौते की दिशा में प्रगति के साथ ईरानी तेल की वापसी से वैश्विक बाजार में आपूर्ति का दबाव कम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी और दुनिया भर में ऊर्जा संकट का जोखिम भी घट सकता है।

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