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होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों पर टोल वसूलने की तैयारी में ईरान, 40 अरब डॉलर सालाना कमाई का लक्ष्य

दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान नई रणनीति पर काम कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर सुरक्षा और पर्यावरणीय सेवाओं के नाम पर शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो ईरान को हर साल लगभग 40 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। हालांकि, इस योजना को लागू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंजूरी और क्षेत्रीय सहमति जैसी कई कानूनी चुनौतियां भी सामने हैं।

होर्मुज से कमाई का नया मॉडल तैयार कर रहा ईरान

रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन के लिए एक नया आर्थिक मॉडल तैयार कर रहा है। प्रस्ताव के तहत इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा, समुद्री निगरानी, बचाव सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण के बदले निर्धारित शुल्क लिया जा सकता है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि इससे देश को हर वर्ष करीब 40 अरब डॉलर तक की आय हो सकती है। इस योजना पर ओमान समेत खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों के साथ भी चर्चा जारी बताई जा रही है।

तुर्की के डार्डानेल्स मॉडल का अध्ययन

ईरान इस प्रस्ताव को तैयार करने के लिए दुनिया के अन्य समुद्री मार्गों के संचालन मॉडल का अध्ययन कर रहा है। विशेष रूप से तुर्की के डार्डानेल्स जलडमरूमध्य का उदाहरण सामने रखा जा रहा है। 1936 के मोंट्रो कन्वेंशन के तहत तुर्की जहाजों से लाइटहाउस, बचाव सेवाओं और समुद्री सुरक्षा जैसी सुविधाओं के लिए शुल्क लेता है। ईरान का मानना है कि इसी तरह की व्यवस्था होर्मुज में भी विकसित की जा सकती है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों जलमार्गों की कानूनी और रणनीतिक स्थिति अलग-अलग है।

अंतरराष्ट्रीय कानून बन सकता है सबसे बड़ी चुनौती

समुद्री कानून के जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में किसी भी स्थायी ट्रांजिट शुल्क व्यवस्था को लागू करने के लिए केवल ईरान का फैसला पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO), संबंधित तटीय देशों और वैश्विक समुद्री कानूनों के अनुरूप व्यापक सहमति आवश्यक होगी। एकतरफा शुल्क लगाने की कोशिश अंतरराष्ट्रीय विवाद को जन्म दे सकती है।

अमेरिका ने जताया कड़ा विरोध

ईरान के प्रस्ताव का अमेरिका ने खुलकर विरोध किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का उपयोग करने के लिए किसी भी देश को एकतरफा शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी व्यवस्था किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते का स्वीकार्य हिस्सा नहीं हो सकती। वहीं ओमान ने भी कहा है कि उसके जलक्षेत्र से होकर गुजरने वाले किसी भी अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर पर ट्रांजिट फीस नहीं लगाई जाएगी और सभी व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के समन्वय में होंगी।

वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है असर

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से गुजरता है। यदि भविष्य में इस मार्ग पर किसी प्रकार का ट्रांजिट शुल्क लागू होता है तो इसका असर वैश्विक शिपिंग लागत, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह योजना प्रारंभिक चर्चा के चरण में है और इसके लागू होने से पहले कई कानूनी, कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

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