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अपने ही देश में दुश्मन की मदद करने वालों पर ईरान का बड़ा शिकंजा, 3 हजार से अधिक गिरफ्तार

ईरान ने देश के भीतर दुश्मन देशों के लिए कथित तौर पर काम करने वाले नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा कसते हुए पिछले कुछ महीनों में 3,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का दावा है कि इनमें कई लोग इज़रायली खुफिया एजेंसी मोसाद के संपर्क में थे और संवेदनशील सूचनाएं लीक करने के साथ-साथ युद्ध के दौरान दुश्मन की मदद कर रहे थे।

जासूसी और दुश्मन से संपर्क के आरोप में बड़े पैमाने पर कार्रवाई

ईरान की न्यायपालिका ने जानकारी दी है कि बीते कुछ महीनों में राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों के आरोप में 3,292 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार लोगों पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए गए हैं, जिनमें दुश्मन देशों के साथ संपर्क रखना, संवेदनशील सूचनाएं साझा करना और युद्ध के दौरान शत्रु पक्ष की सहायता करना शामिल है। ईरानी प्रशासन का कहना है कि यह अभियान देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और आंतरिक खतरों पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

सैकड़ों लोगों पर युद्ध संबंधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप

न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर के मुताबिक गिरफ्तार किए गए लोगों में 684 ऐसे व्यक्ति शामिल हैं, जिन पर इज़रायल की मदद करते हुए ऑपरेशनल गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप है। इसके अलावा 1,258 लोगों पर सरकार विरोधी प्रचार और राजनीतिक गतिविधियों के जरिए माहौल प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक 1,061 लोगों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए जा चुके हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

मोसाद से जुड़े नेटवर्क का दावा, खुफिया जानकारी लीक होने का आरोप

ईरानी अधिकारियों का दावा है कि गिरफ्तार किए गए कई लोग इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के संपर्क में थे। आरोप है कि ये लोग देश की संवेदनशील जानकारियां बाहर पहुंचा रहे थे, जिससे सुरक्षा और सैन्य रणनीतियों को नुकसान पहुंचा। प्रशासन के मुताबिक कुछ संदिग्ध जमीनी स्तर पर भी सक्रिय थे और युद्ध के दौरान दुश्मन पक्ष को सहयोग उपलब्ध करा रहे थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

100 संदिग्धों की संपत्तियां भी की गईं जब्त

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दायरे में आए लोगों के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई भी की जा रही है। हाल ही में इस्फहान प्रांत में करीब 100 लोगों की संपत्तियां जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के पर्याप्त सबूत मिलेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए जाएंगे।

देशद्रोह के मामलों में मिल सकती है कड़ी सजा

ईरान के कानून के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गंभीर अपराधों को बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर लंबी कैद से लेकर मौत की सजा तक का प्रावधान है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं मानवाधिकार संगठनों की नजर भी इन मामलों पर बनी हुई है।

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