राजस्थान सीमा पर ड्रोन से नशे और हथियारों की घुसपैठ, सात महीने में 304 करोड़ की हेरोइन बरामद
बीकानेर: भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिए नशे और हथियारों की तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में विभिन्न कार्रवाई के दौरान करीब 69.8 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 304 करोड़ रुपये बताई गई है। हाल ही में बीकानेर के खाजूवाला क्षेत्र से बड़ी मात्रा में हेरोइन, विदेशी पिस्टल और कारतूस मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क की जांच और निगरानी तेज कर दी है।
सीमा पार से ड्रोन के जरिए सक्रिय हुआ तस्करी नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के माध्यम से नशे और हथियारों की खेप सीमावर्ती इलाकों में गिराई जा रही है। शुरुआती जांच में श्रीगंगानगर के करणपुर, रायसिंहनगर, रावला, हिन्दूमलकोट, केसरीसिंहपुर और जैतसर के साथ बीकानेर के खाजूवाला क्षेत्र तक इस नेटवर्क की सक्रियता के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि रात के समय ड्रोन से खेतों या सुनसान स्थानों पर खेप गिराई जाती है, जिसे स्थानीय संपर्कों की मदद से आगे पहुंचाया जाता है। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
युवाओं को लालच देकर बनाया जा रहा कथित माध्यम
संयुक्त जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में स्थानीय युवाओं को पैसों का लालच देकर ड्रोन से गिराई गई खेप उठाने के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। इसके बाद यह सामान अलग-अलग राज्यों में सक्रिय तस्करी नेटवर्क तक पहुंचाया जाता है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे संदिग्ध संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के नेटवर्क स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़कर अपनी गतिविधियां फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
हेरोइन के साथ विदेशी हथियार मिलने से बढ़ी चिंता
हालिया बरामदगी में हेरोइन के साथ विदेशी पिस्टल और कारतूस मिलने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि नशे की खेप के साथ हथियार भी भेजे जा रहे हैं, तो इसका असर केवल तस्करी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि संगठित अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। इसी कारण ड्रोन के जरिए होने वाली इस तरह की गतिविधियों को सुरक्षा एजेंसियां गंभीर खतरे के रूप में देख रही हैं और हर पहलू की जांच कर रही हैं।
एंटी-ड्रोन तकनीक और निगरानी व्यवस्था को किया जा रहा मजबूत
सीमा पर लगातार बढ़ती ड्रोन गतिविधियों को देखते हुए एंटी-ड्रोन सिस्टम, आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत किया जा रहा है। बीएसएफ, पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से निगरानी अभियान चला रही हैं। उद्देश्य यह है कि सीमा पार से होने वाली ड्रोन ड्रॉपिंग को समय रहते रोका जा सके और तस्करी नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचा जा सके।
हाल की बरामदगियों ने जांच को दी नई दिशा
इस वर्ष कई अलग-अलग अभियानों में ड्रोन से गिराई गई हेरोइन और हथियार बरामद किए गए हैं। अप्रैल में पूगल क्षेत्र में सड़क दुर्घटना के बाद एक स्कूटी से 14 किलोग्राम हेरोइन मिलने का मामला सामने आया था। वहीं, हाल में खाजूवाला क्षेत्र से 10 किलोग्राम हेरोइन, 11 विदेशी पिस्टल और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद किए गए। जांच में कुछ आरोपियों के संबंध पाली और जैतारण क्षेत्र से सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इन इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है और सभी संदिग्ध कड़ियों की पड़ताल की जा रही है।