रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा भारत, जानिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कितना पड़ेगा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है और संभावित आपूर्ति संकट के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी तेल बाजार में हलचल
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर देखने को मिल रहा है। हालिया घटनाओं के बाद ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, हालांकि बाद में इनमें कुछ नरमी भी देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है।
रूस से तेल आयात में भारत ने किया बड़ा इजाफा
भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। ट्रेड इंटेलिजेंस फर्म कैपलर के आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में रूसी तेल का आयात बढ़कर करीब 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। इससे भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग आधी हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि स्थिर आपूर्ति और कम कीमतें भारत के लिए महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं।
ब्रेंट क्रूड की तुलना में सस्ता पड़ रहा रूसी तेल
भारतीय रिफाइनरियां फिलहाल रूसी कच्चे तेल को प्राथमिकता दे रही हैं, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड के मुकाबले प्रति बैरल कई डॉलर सस्ता उपलब्ध हो रहा है। भारत लंबे समय से अपनी अधिकांश तेल जरूरतें पश्चिम एशियाई देशों से पूरी करता रहा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ी है। इससे आयात लागत को नियंत्रित रखने में भी मदद मिल रही है।
कच्चे तेल की कीमतों का सीधे पड़ता है असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है और हर साल अरबों डॉलर का तेल विदेशों से खरीदता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली वृद्धि भी देश के आयात बिल पर बड़ा असर डाल सकती है। यही वजह है कि सरकार और तेल कंपनियां आपूर्ति के विविध स्रोतों पर लगातार ध्यान दे रही हैं।
सऊदी अरब और यूएई भी बने हुए हैं अहम साझेदार
रूस के अलावा संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं। क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत विभिन्न देशों से तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को संतुलित बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी रूस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार बना रह सकता है।
आज क्या हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां रोजाना अपडेट करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद हाल के दिनों में घरेलू ईंधन कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स और वैट के कारण कीमतों में अंतर हो सकता है, इसलिए उपभोक्ताओं को अपने शहर के ताजा रेट जरूर जांचने चाहिए।