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होर्मुज संकट के बीच अमेरिका बना भारत के लिए एलपीजी का बड़ा सहारा, रिकॉर्ड आयात के पार पहुंचा आंकड़ा

पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आई बाधाओं के बीच भारत ने रसोई गैस की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक रणनीति अपनाई है। इसी क्रम में जून में अमेरिका से एलपीजी आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और पहली बार 10 लाख टन के आंकड़े को पार करने जा रहा है।

जून में अमेरिका से एलपीजी आयात ने बनाया नया रिकॉर्ड

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद भारत ने एलपीजी आपूर्ति के लिए अमेरिका की ओर रुख किया है। जून महीने में अमेरिका से 11 से 12 लाख मीट्रिक टन एलपीजी आयात होने का अनुमान है, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा माना जा रहा है। यह पहली बार है जब अमेरिकी एलपीजी आयात 10 लाख टन के स्तर को पार करने जा रहा है। इससे घरेलू बाजार में रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

ईरान संकट से प्रभावित हुई थी गैस सप्लाई

भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा लंबे समय से पश्चिम एशियाई देशों से पूरा करता रहा है। लेकिन क्षेत्रीय तनाव और समुद्री मार्गों में आई बाधाओं के कारण अप्रैल में एलपीजी आयात घटकर केवल 6.96 लाख टन रह गया था। बाद में वैकल्पिक स्रोतों से खरीद बढ़ाने के प्रयासों के चलते मई में यह आंकड़ा फिर बढ़कर 11.5 लाख टन तक पहुंच गया। संकट के इस दौर ने भारत को ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में और अधिक सक्रिय बना दिया है।

सरकार ने घरेलू स्तर पर भी बनाई रणनीति

रसोई गैस की संभावित कमी से बचने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। रिफाइनरियों को अधिकतम एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल सेक्टर की तुलना में घरों के लिए गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार को भी तेज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से एलपीजी की मांग में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

पारंपरिक सप्लायर देशों से भी सामान्य हो रही आपूर्ति

हालांकि अमेरिका से आयात में तेजी आई है, लेकिन भारत के पारंपरिक आपूर्तिकर्ता देश भी धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट रहे हैं। जून में संयुक्त अरब अमीरात से 3 से 4 लाख टन एलपीजी मिलने की संभावना है। इसके अलावा कुवैत, ओमान, कतर, अल्जीरिया और नाइजीरिया से भी अतिरिक्त कार्गो आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे भारत की कुल आपूर्ति स्थिति और मजबूत होगी।

होर्मुज में सुधार से घट सकती हैं वैश्विक कीमतें

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि आने वाले समय में होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही सामान्य होती है तो पश्चिम एशिया से एलपीजी आपूर्ति में तेजी आएगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और भारत को महंगे वैकल्पिक आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह स्थिति भारत के लिए राहत लेकर आ सकती है।

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