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सस्ते आयात पर भारत का सख्त प्रहार, चीन-अमेरिका और EU से आने वाले इस केमिकल पर लगी एंटी-डंपिंग ड्यूटी

घरेलू उद्योगों को सस्ते आयात से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए भारत ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ से आयात होने वाले रबर और टायर उद्योग में इस्तेमाल होने वाले ‘सल्फनामाइड्स एक्सेलेरेटर्स’ केमिकल पर पांच साल के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है।

रबर और टायर उद्योग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल पर कार्रवाई

भारत सरकार ने चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ से आयात किए जाने वाले ‘सल्फनामाइड्स एक्सेलेरेटर्स’ पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की घोषणा की है। यह केमिकल मुख्य रूप से रबर और टायर निर्माण उद्योग में उपयोग किया जाता है। सरकार का मानना है कि कम कीमत पर आयात किए जा रहे इस उत्पाद से घरेलू उत्पादकों को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए पांच वर्षों के लिए यह सुरक्षात्मक कदम उठाया गया है।

DGTR की सिफारिश के बाद लिया गया फैसला

वित्त मंत्रालय ने वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) की सिफारिश के आधार पर यह निर्णय लिया है। जांच में पाया गया कि संबंधित देशों से यह केमिकल सामान्य बाजार मूल्य से कम कीमत पर भारत भेजा जा रहा था, जिससे घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा था। सरकार ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू करने का फैसला किया।

75 डॉलर से 1,748 डॉलर प्रति टन तक लगेगा शुल्क

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, आयातित उत्पाद पर 75 डॉलर प्रति टन से लेकर 1,748 डॉलर प्रति टन तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है। यह व्यवस्था अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर सरकार इसे संशोधित या समाप्त भी कर सकती है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा का संतुलित माहौल तैयार करना है।

एल्यूमीनियम फॉयल पर भी बढ़ाई गई ड्यूटी

सरकार ने एक अलग अधिसूचना में चीन, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया से आयात होने वाले एल्युमीनियम फॉयल पर लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी की अवधि भी बढ़ा दी है। राजस्व विभाग के अनुसार यह व्यवस्था 15 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इससे पहले भी इन देशों से सस्ते आयात को लेकर घरेलू उद्योगों ने चिंता जताई थी।

चीन से आने वाले PET रेजिन पर भी पांच साल की ड्यूटी

भारत ने चीन से आयात होने वाले पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) रेजिन पर भी पांच साल के लिए 200.66 डॉलर प्रति टन की एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। यह रेजिन विभिन्न औद्योगिक उत्पादों और पैकेजिंग सामग्री में इस्तेमाल किया जाता है। सरकार का कहना है कि इस कदम से घरेलू निर्माताओं को राहत मिलेगी और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

क्या होती है एंटी-डंपिंग ड्यूटी?

एंटी-डंपिंग ड्यूटी वह शुल्क है, जिसे किसी देश द्वारा तब लगाया जाता है जब विदेशी कंपनियां अपने उत्पादों को सामान्य कीमत से कम दरों पर बेचकर स्थानीय उद्योग को नुकसान पहुंचाती हैं। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत देशों को ऐसा कदम उठाने की अनुमति है। इसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करना होता है।

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