यूरेनियम आपूर्ति पर छिड़ी सियासी बहस, संबित पात्रा ने UPA काल का किया जिक्र
ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और बीजेपी सांसद एवं प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए। बहस का केंद्र भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग, यूरेनियम आपूर्ति और विभिन्न सरकारों की भूमिका रही।
जयराम रमेश के दावे पर बीजेपी का पलटवार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि केंद्र सरकार वर्ष 2008 में हुई नीतिगत प्रगति का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है। उनके इस बयान के जवाब में बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा कि इतिहास को चुनिंदा तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के समय किए गए दावों के बावजूद भारत को तत्काल यूरेनियम आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो सकी थी।
संबित पात्रा ने 2010 की घटना का किया उल्लेख
संबित पात्रा ने अपने बयान में कहा कि वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार किया था। उनका कहना था कि यदि पहले की नीतियों से सभी बाधाएं दूर हो चुकी थीं, तो उस समय यह स्थिति क्यों बनी। उन्होंने इस घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि बाद के वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव आया और दोनों देशों ने परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाया।
2014 के परमाणु सहयोग समझौते का भी किया जिक्र
बीजेपी सांसद ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा सहयोग का रास्ता खुला और भारत के लिए ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम निर्यात का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके बाद दोनों देशों ने ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को भी विस्तार दिया।
भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग का संक्षिप्त इतिहास
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच परमाणु सहयोग को लेकर वर्षों तक चर्चा होती रही। 2008 में भारत को असैन्य परमाणु व्यापार की अनुमति मिलने के बाद भी ऑस्ट्रेलिया की घरेलू नीति के कारण यूरेनियम निर्यात तुरंत शुरू नहीं हो सका। बाद में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी नीति में बदलाव किया और 2014 में दोनों देशों ने असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद द्विपक्षीय सहयोग में नई प्रगति देखने को मिली।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच तथ्य भी बने चर्चा का विषय
यूरेनियम आपूर्ति और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी अलग-अलग राजनीतिक दावे कर रही हैं। जहां कांग्रेस अपने कार्यकाल में हुई कूटनीतिक पहल का उल्लेख कर रही है, वहीं बीजेपी का कहना है कि वास्तविक प्रगति और समझौते उसके शासनकाल में हुए। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष ऐतिहासिक दस्तावेजों, आधिकारिक समझौतों और समय-क्रम के आधार पर ही तय किए जा सकते हैं।