दतिया उपचुनाव में खेत बने चुनावी मंच, ‘ट्रैक्टर पॉलिटिक्स’ ने खींचा सबका ध्यान
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में इस बार चुनाव प्रचार का एक अलग ही अंदाज देखने को मिल रहा है। जनसभाओं और भाषणों के साथ-साथ खेतों में ट्रैक्टर चलाते और किसानों के साथ खेती का काम करते नेताओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेताओं की ऐसी तस्वीरें सामने आने के बाद चुनावी गलियारों में इसे ‘ट्रैक्टर पॉलिटिक्स’ का नया ट्रेंड बताया जा रहा है। इन वीडियो ने चुनावी रणनीति और किसानों से जुड़ाव को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
भाजपा नेता का खेत में काम करते वीडियो चर्चा में
भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के भतीजे नितिन तिवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। वीडियो में वे ग्रामीण क्षेत्र के एक खेत में किसान के साथ ट्रैक्टर चलाते, धान की रोपाई में हाथ बंटाते और खेती से जुड़े कार्य करते दिखाई दे रहे हैं। समर्थक इसे किसानों के प्रति जुड़ाव का संदेश बता रहे हैं। वहीं विपक्षी समर्थक इसे चुनावी अभियान का हिस्सा मान रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यह चुनावी चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
कांग्रेस नेता का वीडियो भी हुआ वायरल
भाजपा के वीडियो से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें वे एक किसान के खेत में ट्रैक्टर चलाते और ग्रामीणों के बीच समय बिताते दिखाई दिए। कांग्रेस समर्थकों ने इसे किसानों के साथ पार्टी की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। दोनों वीडियो अलग-अलग समय पर सामने आए, लेकिन अब सोशल मीडिया पर उनकी तुलना की जा रही है। चुनाव प्रचार के इस अलग अंदाज ने राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी है।
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सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘ट्रैक्टर पॉलिटिक्स’ की बहस
दोनों दलों के नेताओं के वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर ‘ट्रैक्टर पॉलिटिक्स’ शब्द तेजी से चर्चा में आ गया है। कई यूजर्स का मानना है कि चुनाव के दौरान नेता किसानों के बीच जाकर अपनी छवि मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे ग्रामीण मतदाताओं तक पहुंचने की चुनावी रणनीति के रूप में देख रहे हैं। अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के बीच ये वीडियो उपचुनाव के प्रचार अभियान का सबसे चर्चित हिस्सा बन चुके हैं।
किसानों के बीच पहुंचकर साधे जा रहे ग्रामीण वोट
दतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। गांवों में जनसंपर्क अभियान के साथ किसान परिवारों से मुलाकात, खेतों में पहुंचकर खेती-किसानी से जुड़े कार्यों में भागीदारी और स्थानीय लोगों से संवाद चुनाव प्रचार का अहम हिस्सा बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कृषि आधारित इलाकों में किसानों के साथ सीधे जुड़ने की कोशिश चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। आने वाले दिनों में ऐसे प्रचार अभियान और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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