36 राफेल जेट के मेंटेनेंस टेंडर से फिर छिड़ी बहस, पूर्व पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने भारत और डसॉल्ट पर उठाए सवाल
भारतीय वायुसेना द्वारा सभी 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए मेंटेनेंस सपोर्ट का टेंडर जारी किए जाने के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले वर्ष हुए सैन्य संघर्ष से जुड़े दावे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। पाकिस्तान, जो लंबे समय से संघर्ष के दौरान भारतीय राफेल विमानों को नुकसान पहुंचाने का दावा करता रहा है, अब इस टेंडर पर भी सवाल उठा रहा है। पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भारत और फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, भारत की ओर से पहले ही ऐसे दावों को खारिज किया जा चुका है।
36 राफेल विमानों के लिए जारी हुआ मेंटेनेंस टेंडर
भारतीय वायुसेना ने हाल ही में सभी 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए पांच महीने के “ब्रिज सपोर्ट पैकेज” हेतु रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। इस पैकेज का उद्देश्य दीर्घकालिक मेंटेनेंस अनुबंध अंतिम रूप लेने तक विमानों की संचालन क्षमता, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, तकनीकी सहायता और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सुनिश्चित करना है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार का अंतरिम मेंटेनेंस अनुबंध रक्षा क्षेत्र में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है, ताकि ऑपरेशनल तैयारियों पर कोई असर न पड़े।
पाकिस्तान के दावों पर फिर छिड़ी बहस
पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीमित सैन्य संघर्ष के बाद पाकिस्तान लगातार दावा करता रहा है कि उसने भारतीय वायुसेना के कुछ राफेल लड़ाकू विमानों को मार गिराया था। भारतीय अधिकारियों ने उस समय इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। अब जब भारतीय वायुसेना ने सभी 36 राफेल विमानों के लिए मेंटेनेंस टेंडर जारी किया है, तो इस दस्तावेज को पाकिस्तान के दावों के विपरीत एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसी वजह से यह मुद्दा दोनों देशों के मीडिया और रणनीतिक हलकों में फिर चर्चा का विषय बन गया है।
अब्दुल बासित ने भारत और डसॉल्ट पर लगाए आरोप
भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त और जर्मनी में पूर्व राजदूत रह चुके अब्दुल बासित ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि भारतीय वायुसेना के टेंडर दस्तावेज वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राफेल बनाने वाली फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट अपने व्यावसायिक हितों की वजह से भारत का समर्थन कर रही है। बासित ने कहा कि यदि पाकिस्तान के दावे सही हैं तो मेंटेनेंस अनुबंध 36 के बजाय कम विमानों के लिए होना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किया।
भारत का रुख पहले से स्पष्ट
भारतीय सैन्य अधिकारियों ने पहले भी पाकिस्तान के उन दावों को निराधार बताया था, जिनमें राफेल विमानों को मार गिराने की बात कही गई थी। भारत का कहना रहा है कि पाकिस्तान की ओर से किए गए ऐसे दावों के समर्थन में कोई विश्वसनीय और स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आए हैं। अब जारी हुए मेंटेनेंस टेंडर में भी सेवा में मौजूद सभी 36 राफेल विमानों के लिए सहायता पैकेज की मांग की गई है, जिससे इस विषय पर बहस फिर तेज हो गई है। हालांकि, भारत ने इस नए विवाद पर अलग से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
‘ब्रिज सपोर्ट पैकेज’ का क्या होता है मतलब?
ब्रिज सपोर्ट पैकेज रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला एक अस्थायी मेंटेनेंस अनुबंध होता है। इसका उद्देश्य मुख्य दीर्घकालिक अनुबंध लागू होने तक विमानों की नियमित तकनीकी देखभाल, स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति और आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता सुनिश्चित करना है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि लड़ाकू विमान पूरी क्षमता के साथ संचालन के लिए उपलब्ध रहें। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अनुबंध किसी भी आधुनिक वायुसेना के लिए नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और इन्हें किसी असाधारण घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।