ट्रिब्यूनल में SC-ST-OBC आरक्षण पर संजय सिंह का सवाल, राज्यसभा में सरकार को घेरा
नई दिल्ली। ट्रिब्यूनल के गठन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा में केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब न्यायपालिका में वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर लगातार चर्चा होती है, तो ट्रिब्यूनल के गठन में इन वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था क्यों नहीं है। संजय सिंह ने सरकार पर आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण संस्थाओं में नियुक्तियों और प्रतिनिधित्व को लेकर सामाजिक संतुलन के सवालों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दलित प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया
संजय सिंह ने कहा कि संसद में पहले भी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के न्यायाधीशों की संख्या को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उनके मुताबिक, सरकार की ओर से यह कहा गया था कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में सरकार की सीधी भूमिका नहीं होती और नियुक्तियां कॉलेजियम व्यवस्था के माध्यम से होती हैं। संजय सिंह ने इसी तर्क को ट्रिब्यूनल की नियुक्तियों के संदर्भ से जोड़ते हुए सरकार से सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
ट्रिब्यूनल में नियुक्तियों को लेकर सरकार पर निशाना
आप सांसद ने ट्रिब्यूनल के गठन और उसमें पूर्व न्यायाधीशों की नियुक्ति का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि इन नियुक्तियों में SC, ST और OBC समुदायों को कितना प्रतिनिधित्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार महत्वपूर्ण संस्थाओं में नियुक्तियों का अधिकार अपने पास रखती है, तो सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के सवालों का जवाब भी सरकार को देना चाहिए। उनका तर्क था कि संस्थागत व्यवस्था में सभी सामाजिक वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
NCLT को लेकर भी केंद्र सरकार पर लगाए आरोप
संजय सिंह ने अपने संबोधन में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि NCLT के जरिए बड़े कॉर्पोरेट मामलों में हजारों करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़े फैसले किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वीडियोकोन कंपनी के मामले में भी बड़ी राशि के कर्ज का करीब 97 प्रतिशत हिस्सा माफ किए जाने की स्थिति बनी। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप संजय सिंह के राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा हैं और इनके संबंध में संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर अलग से पुष्टि जरूरी है।
आम जनता और कॉर्पोरेट कर्ज का मुद्दा उठाया
संजय सिंह ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एक तरफ बड़े कॉर्पोरेट समूहों के कर्ज से जुड़े मामलों में राहत दी जा रही है, जबकि दूसरी तरफ आम लोगों पर टैक्स और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक फैसलों में आम जनता और कमजोर वर्गों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कर्ज समाधान की प्रक्रिया में आम नागरिकों और बड़े कारोबारी समूहों के लिए व्यवस्था किस तरह संतुलित है।
सामाजिक प्रतिनिधित्व पर फिर तेज हुई बहस
राज्यसभा में उठाए गए इस मुद्दे के बाद न्यायिक संस्थाओं और ट्रिब्यूनल में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस फिर चर्चा में आ गई है। संजय सिंह ने SC, ST और OBC वर्गों की भागीदारी को लेकर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। अब इस मुद्दे पर सरकार की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है, इस पर नजर रहेगी। ट्रिब्यूनल की नियुक्तियों और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़े नियमों को लेकर आगे संसद में भी चर्चा होने की संभावना है।