होर्मुज से भारत के लिए रवाना हुए 11 टैंकर, कच्चा तेल और खाद की आपूर्ति को मिली राहत
ईरान-अमेरिका के बीच तनाव कम होने के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत के लिए कच्चा तेल, एलपीजी और खाद लेकर 11 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं, हालांकि अभी भी 10 भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं।
समझौते के बाद सामान्य होने लगी समुद्री आवाजाही
ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बहाल हो रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हाल के दिनों में भारत आने वाले 11 जहाज सफलतापूर्वक इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में अभी भी भारत के ध्वज वाले 10 जहाज मौजूद हैं और दो अन्य भारतीय जहाज हाल ही में इस क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं।
कच्चा तेल, एलपीजी और खाद लेकर आ रहे हैं जहाज
भारत के लिए रवाना हुए जहाजों में ऊर्जा और कृषि क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण आपूर्ति शामिल है। इनमें भारत के ध्वज वाले तीन बड़े तेल टैंकर शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक में लगभग 2.85 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा हुआ है। इसके अलावा एक विदेशी ध्वज वाला तेल टैंकर, एक एलपीजी कैरियर और छह बल्क कैरियर भी भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों में देश की कृषि जरूरतों के लिए खाद की खेप भी शामिल है, जिससे आपूर्ति संबंधी चिंताओं में कमी आने की उम्मीद है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता दुनिया के बड़े तेल और गैस निर्यातक देशों के लिए जीवनरेखा की तरह है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देश इसी मार्ग के जरिए ऊर्जा उत्पादों का निर्यात करते हैं। भारत जैसे बड़े आयातक देशों की ऊर्जा जरूरतें भी काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर करती हैं।
तनाव के कारण प्रभावित हुई थी वैश्विक सप्लाई चेन
क्षेत्रीय संघर्ष के चलते होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे वैश्विक तेल बाजार और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया था। समुद्री मार्ग में बाधा आने से ऊर्जा कीमतों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि हालिया कूटनीतिक प्रयासों के बाद स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य होने लगी हैं।