जोधपुर में चिकित्सा मंत्री का बड़ा बयान: सरकारी अस्पतालों में आते हैं सबसे गंभीर मरीज, हर जान बचाना संभव नहीं
जोधपुर में गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज की नई बिल्डिंग के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सरकारी अस्पतालों की चुनौतियों पर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में अधिकतर ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिनकी हालत पहले से बेहद गंभीर होती है, ऐसे में हर मरीज को बचाना हमेशा संभव नहीं होता।
सरकारी अस्पतालों पर मंत्री का बयान
मंत्री खींवसर ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या उन लोगों की होती है, जिन्हें निजी अस्पताल गंभीर हालत में रेफर कर देते हैं या जो आर्थिक कारणों से वहां इलाज नहीं करा पाते। उन्होंने कहा कि ऐसे क्रिटिकल केसों में इलाज करना डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है और कई बार सर्वाइवल रेट सामान्य मरीजों की तुलना में कम रहती है।
‘केवल घटनाओं को नहीं, परिस्थितियों को भी समझें’
उन्होंने कहा कि जब किसी मरीज की मौत हो जाती है तो उसकी चर्चा ज्यादा होती है, लेकिन जिन गंभीर परिस्थितियों में डॉक्टर लगातार इलाज करते हैं, उस पर कम ध्यान दिया जाता है। मंत्री ने कहा कि सरकारी चिकित्सक सीमित संसाधनों के बावजूद पूरी क्षमता से सेवाएं दे रहे हैं और कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रसूता मौत मामलों पर भी दी सफाई
कोटा और बीकानेर में प्रसूताओं की मौत के मामलों पर उठ रहे सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि हर मामले को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि यदि कोई मरीज पहले से ही अत्यंत गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचता है, तो इलाज के प्रयासों के बावजूद परिणाम हर बार सकारात्मक नहीं हो सकते।
नए चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण
इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने मिलकर उम्मेद अस्पताल में नव निर्मित पीजी हॉस्टल और अत्याधुनिक एमआरआई सेंटर का उद्घाटन किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि पीजी हॉस्टल से मेडिकल छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधा मिलेगी, जबकि एमआरआई सेंटर से मरीजों को एक ही परिसर में उन्नत जांच सेवाएं उपलब्ध होंगी।
डॉक्टरों की चुनौतियों पर जोर
मंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पताल सबसे कठिन परिस्थितियों वाले मरीजों का इलाज करते हैं और डॉक्टर लगातार बेहतर सेवा देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्था को समझने के लिए सिर्फ परिणाम नहीं, बल्कि मरीज की स्थिति और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।