राम रहीम फिर 21 दिन की फरलो पर बाहर, कांग्रेस ने BJP पर साधा निशाना
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के एक बार फिर जेल से बाहर आने पर सियासी विवाद शुरू हो गया है। राम रहीम 21 दिन की फरलो पर रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आया है। उसके बाहर आने पर कांग्रेस ने बीजेपी और हरियाणा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण की बात करने वाली बीजेपी का रवैया इसके उलट है। उन्होंने राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो मिलने को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की।
21 दिन की फरलो पर जेल से बाहर आया राम रहीम
रेप के मामलों में दोषी ठहराए गए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर जेल से रिहाई मिली है। वह रोहतक की सुनारिया जेल से 21 दिन की फरलो पर बाहर आया है। जानकारी के मुताबिक फरलो की अवधि के दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में रहेगा। अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से राम रहीम को कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। इस साल भी यह उसकी तीसरी अस्थायी रिहाई बताई जा रही है।
पवन खेड़ा ने बीजेपी पर किया तीखा हमला
राम रहीम की रिहाई को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि बीजेपी महिलाओं के आरक्षण और सशक्तिकरण को लेकर चाहे जितनी बातें करे, लेकिन ऐसे मामलों में उसका रवैया सवाल खड़े करता है। उन्होंने राम रहीम को बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिलने पर सरकार को घेरा। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि महिलाओं की सुरक्षा की बात करने वाली पार्टी को इस तरह की रिहाई पर जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस ने कहा- बार-बार मिल रही अस्थायी रिहाई
कांग्रेस की ओर से राम रहीम की अस्थायी रिहाई की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि 2017 में गिरफ्तारी के बाद से राम रहीम कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आ चुका है। पवन खेड़ा ने दावा किया कि वह अब तक 450 से अधिक दिन जेल से बाहर बिता चुका है। कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, पैरोल और फरलो की मंजूरी संबंधित कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होती है।
पत्रकार हत्याकांड में भी रहा है दोषी
राम रहीम रेप के मामलों के अलावा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया गया था। हालांकि, मार्च 2026 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में उसे बरी कर दिया था। इससे पहले विशेष सीबीआई अदालत ने उसे हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट के फैसले के बाद मामले से जुड़े पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। राम रहीम की कानूनी स्थिति को लेकर अलग-अलग मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी रही है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भी रही चर्चा में
राम रहीम से जुड़े पत्रकार हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार के रुख पर भी टिप्पणी हुई थी। 10 अगस्त की सुनवाई में राम रहीम के वकील ने अदालत को बताया था कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार ने अपील दाखिल नहीं की है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार के संभावित रुख को लेकर टिप्पणी की थी। ऐसे में राम रहीम की नई फरलो के साथ पुराना राजनीतिक और कानूनी विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
फरलो के बाद फिर तेज हुई सियासी बयानबाजी
राम रहीम के जेल से बाहर आने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। कांग्रेस इसे महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मुद्दे से जोड़ रही है, जबकि राम रहीम की रिहाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। ऐसे में इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ फरलो के नियम और उसके आधार भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। फिलहाल राम रहीम 21 दिन की फरलो अवधि के दौरान सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहेगा।