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G7 के सख्त रुख से बढ़ सकती है भारत की चिंता, रूसी तेल पर दबाव बढ़ाने की तैयारी

G7 शिखर सम्मेलन में यूक्रेन को अतिरिक्त सैन्य सहायता देने और रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ाने के संकेतों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। यदि रूस के तेल और गैस कारोबार पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो इसका असर उन देशों पर भी पड़ सकता है जो रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए भी आने वाले समय में ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

यूक्रेन को और सैन्य सहायता देने पर G7 देशों की सहमति

G7 देशों के नेताओं ने यूक्रेन के लिए अपना समर्थन दोहराते हुए एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी की क्षमताओं वाले हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने का संकल्प जताया है। साझा बयान में कहा गया कि यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सहयोग जारी रखा जाएगा। इसके साथ ही कीव की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही गई है, ताकि वह लंबे समय तक युद्ध संबंधी जरूरतों को पूरा कर सके।

रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ सकता है दबाव

G7 देशों ने संकेत दिए हैं कि रूस की युद्ध आधारित अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए तेल और गैस क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंधों को और मजबूत किया जा सकता है। पश्चिमी देशों का मानना है कि ऊर्जा निर्यात रूस की आय का प्रमुख स्रोत है और उस पर अंकुश लगाकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सकता है। इस दिशा में नए प्रतिबंधों और निगरानी उपायों पर विचार किया जा रहा है।

भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर

रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने वाले देशों के लिए नए प्रतिबंध चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। भारत पिछले कुछ वर्षों में रूसी तेल का प्रमुख खरीदार बनकर उभरा है। यदि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति प्रभावित होती है या कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, तो इसका असर भारत के ऊर्जा आयात और घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। हालांकि भारत लगातार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

यूरोपीय संघ पहले ही लगा चुका है कई प्रतिबंध

यूरोपीय संघ रूस के खिलाफ पहले ही कई प्रतिबंध पैकेज लागू कर चुका है। हालिया कदमों में रूसी तेल कारोबार और उन जहाजों पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश की गई है, जिनके जरिए तेल निर्यात किया जाता है। पश्चिमी देशों का उद्देश्य रूस की आय सीमित करना और यूक्रेन के समर्थन के लिए दबाव बनाए रखना है।

ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक एजेंडे का अहम मुद्दा

G7 नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की स्थिरता को भी महत्वपूर्ण बताया है। साथ ही यूक्रेन को आगामी सर्दियों के दौरान ऊर्जा जरूरतों से निपटने में सहायता देने का भरोसा जताया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का असर आने वाले समय में भी वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बना रह सकता है।

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