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शिवसेना (यूबीटी) में नई हलचल, छह सांसदों के अलग होने की अटकलें तेज

राष्ट्रीय राजनीति में दलों के भीतर उठापटक का दौर जारी है। टीएमसी के बाद अब शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की खबरों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। छह लोकसभा सांसदों के अलग गुट बनाने की चर्चाओं के बीच स्पीकर को पत्र सौंपने का दावा भी सामने आया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शिवसेना (यूबीटी) में संभावित बगावत के संकेत

नई दिल्ली में राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसद अलग रुख अपना सकते हैं। पार्टी के कुछ नेताओं ने दावा किया है कि इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा गया है। हालांकि लोकसभा सचिवालय ने अब तक ऐसे किसी पत्र की पुष्टि नहीं की है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। वहीं, संभावित बगावत को लेकर पार्टी नेतृत्व सतर्क हो गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

नेतृत्व सक्रिय, सांसदों की बैठक और व्हिप जारी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व ने तत्काल कदम उठाए हैं। वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत, अनिल देसाई और संजय राउत ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। साथ ही पार्टी ने सभी सांसदों की अहम बैठक बुलाई है और व्हिप जारी कर उपस्थिति अनिवार्य की है। यह कदम संभावित टूट को रोकने और पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई सियासत

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। संजय राउत ने संभावित बागी सांसदों पर तीखे आरोप लगाए और उन्हें पार्टी के साथ विश्वासघात करने वाला बताया। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को धन के लालच से प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। वहीं अरविंद सावंत ने कहा कि यदि कोई दावा किया जा रहा है तो उससे जुड़े ठोस प्रमाण सामने आने चाहिए। इन आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है।

2022 की बगावत की यादें फिर ताजा

यह घटनाक्रम 2022 में हुई बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की याद दिला रहा है, जब एकनाथ शिंदे की अगुवाई में बगावत के कारण शिवसेना में विभाजन हुआ था और महाराष्ट्र की सत्ता बदल गई थी। अब एक बार फिर उसी तरह की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। इससे पार्टी नेतृत्व के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

उत्तर प्रदेश में भी सियासी हलचल तेज

इधर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल मच गई है। कुछ नेताओं ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद असंतुष्ट हैं और टूट की स्थिति बन सकती है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया है। जवाबी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि पार्टी मजबूत है और किसी भी तरह की टूट की संभावना नहीं है। इस बयानबाजी ने यूपी की सियासत को भी गरमा दिया है

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