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बालोतरा हादसे में चार सगे भाइयों की मौत, एक पिता ने एक साथ खो दिए अपने चारों बेटे

राजस्थान के बालोतरा जिले में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी। रोडवेज बस और कार की टक्कर में एक ही परिवार के चार सगे भाइयों की मौत हो गई। मजदूरी के लिए निकले चारों भाई कभी वापस घर नहीं लौट सके। हादसे के बाद गांव में शोक की लहर है और परिवार की चीख-पुकार ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।

मजदूरी पर निकले थे चारों भाई

कोडूका गांव निवासी उदाराम, रेखाराम, जोगाराम और विशनाराम मंगलवार सुबह रोज की तरह काम पर जाने के लिए घर से निकले थे। परिवार के अनुसार आमतौर पर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर काम मिलता था, लेकिन इस बार सभी को एक ही जगह मजदूरी का काम मिला था। इसी वजह से चारों भाई एक साथ कार में सवार होकर रवाना हुए थे। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी।

सड़क हादसे ने छीन ली चार जिंदगियां

पाटोदी क्षेत्र के पास उनकी कार की रोडवेज बस से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और चारों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इस दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया।

पिता का दर्द सुन हर आंख हुई नम

जब हादसे की खबर परिवार तक पहुंची तो पहले केवल चोट लगने की सूचना दी गई थी। बाद में एक-एक कर चारों बेटों की मौत की जानकारी सामने आई। वृद्ध पिता भंवरलाल बदहवास हो गए और बार-बार यही कहते रहे कि कल तक उनके चार बेटे थे, अब कोई भी नहीं बचा। उनके दर्द और विलाप को देखकर गांव के लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। सांत्वना देने पहुंचे लोग भी भावुक होकर रो पड़े।

छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

चार भाइयों में तीन विवाहित थे और उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं। उदाराम अपने पीछे दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गए, जबकि रेखाराम और विशनाराम के दो-दो बेटे हैं। इन मासूम बच्चों को अभी तक यह एहसास भी नहीं है कि उनके पिता अब कभी घर नहीं लौटेंगे। परिवार के सामने अब भावनात्मक संकट के साथ-साथ आर्थिक चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।

गांव में पसरा मातम, प्रशासन से मदद की मांग

हादसे के बाद पूरे कोडूका गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, रोजगार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रशासन के साथ बातचीत के बाद सहायता का आश्वासन दिया गया है। चारों भाइयों का अंतिम संस्कार एक ही दिन होने से पूरे गांव में गहरा दुख और संवेदना का माहौल बना हुआ है।

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