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संपदा-2 में पहली बड़ी सेंध! फर्जी प्रॉपर्टी आईडी से 2.06 करोड़ का प्लॉट बेचने का खुलासा

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए लागू किए गए संपदा-2 सॉफ्टवेयर में पहली बार बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जालसाजों ने नगर निगम की कथित फर्जी प्रॉपर्टी आईडी तैयार कर करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन की रजिस्ट्री करा दी। मामला तब उजागर हुआ जब खरीदार कब्जा लेने पहुंचा और वास्तविक मालिक ने जमीन बेचने से साफ इनकार कर दिया। अब पूरे प्रकरण की जांच शुरू हो गई है।

2.06 करोड़ की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री से खुला राज

ग्वालियर के टैगोर नगर स्थित मुख्य मार्ग पर मौजूद एक प्लॉट को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब 2.06 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। जमीन के वास्तविक मालिक सुरेश बनवानी को इस सौदे की जानकारी तब हुई जब नए खरीदार कब्जा लेने पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी जमीन किसी को नहीं बेची। इसके बाद पूरे मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया और रजिस्ट्री प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की आशंका सामने आई। प्रारंभिक जांच में यह मामला संगठित धोखाधड़ी का प्रतीत हो रहा है।

फर्जी प्रॉपर्टी आईडी बनाकर तैयार किए गए दस्तावेज

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सबसे पहले नगर निगम की कथित फर्जी प्रॉपर्टी आईडी तैयार करवाई। इसी आधार पर टैक्स रसीद तैयार की गई और उसे रजिस्ट्री के दस्तावेजों में शामिल कर दिया गया। इसके बाद एक व्यक्ति को कागजों में विक्रेता दिखाकर दो अन्य लोगों के नाम जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की सत्यापन प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी सामने आई कई संदिग्ध बातें

मामले में करीब 25.79 लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा कराई गई और रजिस्ट्री दस्तावेज उप-पंजीयक कार्यालय में प्रस्तुत किए गए। जानकारी के अनुसार रजिस्ट्री कुछ दिनों तक लंबित भी रही और एक बार दस्तावेज वापस भी किए गए, लेकिन बाद में उन्हें मंजूरी मिल गई। दस्तावेजों में आधार कार्ड, मोबाइल ओटीपी और भुगतान संबंधी प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि पूरी बिक्री राशि का भुगतान भी तत्काल नहीं किया गया था, जिससे पूरे सौदे की विश्वसनीयता पर संदेह और गहरा गया।

सत्यापन व्यवस्था पर उठे सवाल, जांच के आदेश

इस मामले के सामने आने के बाद संपदा-2 प्रणाली की सुरक्षा और नगर निगम की प्रॉपर्टी सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुराने स्वामित्व रिकॉर्ड और पूर्व रजिस्ट्रियों का गहन सत्यापन किया जाता, तो इस तरह की कथित धोखाधड़ी रोकी जा सकती थी। जिला पंजीयक ने मामले को गंभीर बताते हुए नगर निगम से सत्यापन रिपोर्ट मांगी है और संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।

दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई, जांच जारी

अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री कराने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच एजेंसियां नगर निगम के रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। यदि फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला भविष्य में संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत की भी ओर संकेत करता है।

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