#राज्य-शहर #सोशल

अलवर में गोबर से बने इको-फ्रेंडली गणेश, पर्यावरण बचाने की अनोखी पहल

गणेश चतुर्थी इस सितंबर आने वाली है और हर साल की तरह घर-घर में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की स्थापना होगी। भक्त पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे और अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी का विसर्जन करेंगे। लेकिन इस बार एक खास पहल चर्चा में है, जो सिर्फ भक्ति ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे रही है।

यूआईटी के भूमि अवाप्ति अधिकारी जितेंद्र नरूका ने इस बार गोबर से इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। उनका उद्देश्य साफ है—प्रकृति को बचाते हुए गणेश उत्सव मनाना। उन्होंने आमजन से भी अपील की है कि वे प्लास्टर ऑफ पेरिस और केमिकल रंगों से बनी मूर्तियों की जगह प्राकृतिक प्रतिमाओं को अपनाएं।

नरूका बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में रासायनिक प्रतिमाओं के विसर्जन से नदियों, झीलों और तालाबों में प्रदूषण तेजी से बढ़ा है। इसी चिंता के चलते उन्हें यह अनोखा विचार आया। इंदौर के स्वच्छता विशेषज्ञ अरशद वारसी से प्रेरणा लेकर उन्होंने इस पहल की शुरुआत की।

घर में पाली गई गाय के गोबर से सांचों के जरिए ये प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इन्हें आकर्षक बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों से सजाया भी गया है। फिलहाल ये प्रतिमाएं दोस्तों और रिश्तेदारों को उपहार में दी जा रही हैं।

नरूका का मानना है कि फूलों के गुलदस्ते एक दिन में खत्म हो जाते हैं, लेकिन गणेश प्रतिमा हमेशा पूजी जाती है। खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं का विसर्जन करने की जरूरत नहीं होती। पूजा के बाद इन्हें गमले या पेड़ के नीचे रख दिया जाए, तो समय के साथ यह मिट्टी में मिलकर प्राकृतिक खाद बन जाती है और पौधों को पोषण देती है।

यह पहल सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि एक संदेश है—भक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा भी जरूरी है।

इसे भी पढ़ें – अलवर में ग्राम विकास अधिकारी के स्थानांतरण पर विवाद: सरपंच की चेतावनी के बाद प्रशासन हरकत में

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *